जैसी करनी  वैसी भरनी ,,कहावत हुई सच ,फिर नप गए साहब निजी जमीन में परकोलेशन टैंक: जिम्मेदारों से 27 लाख की वसूली प्रस्तावित जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत पौड़ी माल का मामला

जैसी करनी  वैसी भरनी ,,कहावत हुई सच ,फिर नप गए साहब

निजी जमीन में परकोलेशन टैंक: जिम्मेदारों से 27 लाख की वसूली प्रस्तावित

जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत पौड़ी माल का मामला

मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी तलब की जानकारी

डिंडोरी। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़ी माल में मनरेगा योजना के तहत लाखों की लागत से किसानों की निजी भूमि में परकोलेषन टेंक के निर्माण के मामले में प्रषासन ने कडा रूख अख्तियार करते हुये सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री के विरूद्व 27 लाख की वसूली प्रस्तावित की है। पूरे मसले पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जानकारी तलब की है। जिसके बाद जनपद डिंडौरी के तकनीकी अमले में खलबली मच गई है। फिलहाल जिम्मेदार बचाव की मुद्रा में है। इस बीच निजी भूमि में निर्माण की तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने वाले सहायक यंत्री से किसी भी प्रकार रिकवरी नहीं होने से चर्चाओं का बाजार गर्म है। हैरत की बात तो यह है कि बिल्ली से दूध की रखवाली करवाने की तर्ज पर इन सहायक यंत्री को ही जांच का जिम्मा सौंप दिया गया है, जो मजाक साबित हो रहा है। गौरतलब है कि भूमि स्वामी द्वारा शिकायत जिला स्तर से लेकर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई थी। ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण पूर्व प्रस्ताव और नक्षा खसरा शासकीय भूमि का प्रस्तुत कर स्वीकृति कराई गई वहीं तकनीकी अमला द्वारा बगैर मौके का निरीक्षण किये तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी। इस मामले का समाचार राज एक्सप्रेस द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था जिसको संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने इस बावद तत्काल जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये थे। शुक्रवार को जनपद स्तरीय गठित जांच टीम सहायक यंत्री बिजेन्द्र सारीवान, उपयंत्री अमित नानोटे, और पंचायत समन्वय अधिकारी ठगन सिंह मरावी द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया जिसमें राज एक्सप्रेस की खबर में मुहर लग गई और ग्राम पंचायत पौड़ी माल अंतर्गत नयेगांव माल, पौंडी माल, और गोयरा रैयत में परकोलेशन टैंक निजी भूमि में निर्मित पाये गये। जांच टीम द्वारा तैयार किये गये प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि परकोलेशन टेंक निर्माण कार्यों का खसरा नम्बर एवं रकवा सत्यापन हेतु मौका स्थल की जांच पटवारी से कराया जाना उचित होगा हालांकि प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत पौड़ी माल की सरपंच विषमतिया बाई, सचिव जोहन लाल कोरबा एवं ग्राम रोजगार सहायक भगत लाल हथेष्वर और उपयंत्री कमलेश धूमकेती के द्वारा नियम निर्देश के विरुद्ध परकोलेशन टैंक का निर्माण कार्य शासकीय भूमि में न बनाकर निजी भूमि पर बनाया गया है। तीनों परकोलेशन टैंक निर्माण कार्यों में 27.95 लाख रुपये का दुरुपयोग किया जाना प्रस्तावित किया गया है।

आखिर क्यों बनाए जाते है परकोलेशन टैंक

नियमानुसार गांव में पानी संग्रहण के लिए मनरेगा योजना से शासकीय जमीन पर परकोलेशन टैंक बनाने का प्रावधान है ताकि सभी ग्रामीण पानी का उपयोग कर सके। लेकिन सरपंच ,सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से टैंक का निर्माण निजी जमीन पर करवा दिया गया, ग्राम पंचायत अंतर्गत पौंडी माल, नयेगांव माल, और गोयरा रैयत में लाखों रुपये की लागत से परकोलेशन टैंक का निर्माण कराया गया जिसमें नयेगांव रैयत और पौडी माल में एक ही नक्षा खसरा से पृथक-पृथक तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति दिनांक और लागत दोनों परकोलेशन टैंक में अलग-अलग दर्शाई गई है।

भूमि स्वामी की बगैर सहमति के कराया गया निर्माण कार्य

मनरेगा योजना से कराये गये परकोलेषन टेंक निर्माण किसानों की निजी भूमि में कराये गये हैं लेकिन निर्माण पूर्व भूमि स्वामियों से किसी तरह की सहमति नहीं ली गई है। नएगांव के किसान बालक राम नागेश ने आरोप लगाया था कि मेरी मां के नाम से जंगल किनारे लगभग 35 डिसमिल जमीन है उसमें हमारे द्वारा कृषि कार्य किया जाता है। लेकिन मैं काम करने बाहर चला गया, इस दौरान ग्राम पंचायत ने बगैर सहमति लिए ही टैंक बनवा दिया, जब मैं गांव वापस आया तो इसकी जानकारी लगी जिसके बाद षिकायत दर्ज कराई गई वहीं पोड़ी माल में शांति धाम के पास अजय पिता चेतन के खेत में और गोयरा गांव में ब्रम्हा बाई पति धरम सिंह, और नयेगांव माल में तिजिया बाई पति नेमीलाल के खेत में बना दिए गए।

पहली ही बारिश में नहीं टिक पाया परकोलेशन टैंक

ग्राम पंचायत अंतर्गत वर्ष 2022-23 जनवरी एवं फरवरी माह में तीन परकोलेषन टेंक स्वीकृत हुये थे। शिकायत कर्ता चंद्रिका गोस्वामी ने बताया कि गोयरा में 9 लाख 9 हजार 978 रुपए, पोड़ी मॉल में 10 लाख 72 हजार 547 रुपए, और नएगांव में 9 लाख 99 हजार रुपए जून 2023 के महीने में निकाल लिए गए। लेकिन पौडी माल में निर्मित परकोलेषन टेंक में वेस्ट वेयर का निर्माण नहीं कराये जाने के कारण पहली ही बारिष में बंड क्षतिग्रस्त हो गई जिसकी जांच जनपद स्तरीय टीम द्वारा की गई ओर प्रतिवेदन जिला पंचायत में प्रस्तुत किया गया न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी विहित प्राधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा निर्माण कार्य में गडबडी पाते हुये ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव और तकनीकी अमला को दोषी करार देते हुये लगभग 77 हजार रूपये का देयता अधिरोपित किया ओर सभी जिम्मेदारों से पृथक-पृथक वसूली राषि निर्धारित की गई।

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