मैहर बड़ा अखाड़ा में परम पूज्य महंत श्री श्री 1008 श्री सीता बल्लभ शरण गुरु महाराज जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न

मैहर बड़ा अखाड़ा में परम पूज्य महंत श्री श्री 1008 श्री सीता बल्लभ शरण गुरु महाराज जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास से संपन्न

श्री निवास मिश्रा

मैहर की पावन धरा पर स्थित प्राचीनतम आध्यात्मिक केंद्र बड़ा अखाड़ा गुरु आश्रम में परम पूज्य श्री सद्गुरुदेव भगवान श्री श्री 1008 श्री सीता बल्लभ शरण गुरु महाराज जी का पावन जन्मोत्सव फाल्गुन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि, 11 फरवरी, बुधवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।प्रातःकाल से ही आश्रम परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य संचार होने लगा। गुरु महाराज जी के अनुयायी, भक्तगण, श्रद्धालुजन एवं शिष्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित होकर जप, तप, हवन, भजन-कीर्तन, पाठ एवं आरती के माध्यम से अपने आराध्य गुरुवर के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते रहे। संपूर्ण वातावरण भक्तिरस से ओत-प्रोत था तथा संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच गुरु महिमा का गुणगान किया गया। पत्रकार ने गुरु महराज जी के जन्मोत्सव पर जन्मदिवस पर भक्त वत्सल के संदर्भ में पूछा तो उन्होंने आशीर्वाद रूप में अपना वक्तव्य प्रदान किया।निश्चित ही सद्गुरु का जन्मोत्सव केवल एक तिथि का उत्सव नहीं, बल्कि वह एक दिव्य अवसर होता है जब शिष्य अपने जीवन के आधार स्तंभ का स्मरण कर आत्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। शास्त्रों में भी कहा गया है—

एक तुम्हीं आधार सदगुरु,

जब तक मिलो न जीवन में* *शांति कहाँ मिल सकती मन में।”

जब जीवन में अज्ञान रूपी अंधकार छा जाता है, तब सद्गुरु ही ज्ञानरूपी प्रकाश की धारा बनकर मार्ग प्रशस्त करते हैं। वे ही भवसागर से पार लगाने वाले तारणहार हैं।

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

गुरु ही सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के प्रतीक हैं।

ध्यान का मूल गुरु की मूर्ति है, पूजा का मूल गुरु चरण हैं, मंत्र का मूल गुरु वचन है और मोक्ष का मूल गुरु कृपा है।

*मैहर स्थित बड़ा अखाड़ा आश्रम अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली आध्यात्मिक धरोहर है। मान्यता है कि श्रीराम के वनगमन (राम पथ गमन) के दौरान भी इस आश्रम का पावन स्पर्श हुआ था। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे सरल, सहज एवं भक्तवत्सल गुरुवर का सान्निध्य पाकर मैहर नगरी स्वयं को धन्य अनुभव करती है। गुरु महाराज जी का जीवन सत्य सनातन धर्म की परंपरा, सेवा, साधना और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके श्रीचरणों में कृतज्ञतापूर्वक नमन किया। जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर हम सभी की ओर से परम पूज्य गुरुदेव को कोटि-कोटि प्रणाम, चरण वंदन एवं मंगलकामनाएँ।

ॐ श्री गुरुवे नमः।

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