बगैर भूमि स्वामी की सहमति के निजी भूमि में कराया गया परकोलेशन टैंक का निर्माण,,, शासकीय भूमि का नक्षा खसरा से स्वीकृत करा निजी भूमि में कराया गया कार्य

बगैर भूमि स्वामी की सहमति के निजी भूमि में कराया गया परकोलेशन टैंक का निर्माण

शासकीय भूमि का नक्षा खसरा से स्वीकृत करा निजी भूमि में कराया गया कार्य

मनरेगा योजना से लाखों रुपये की लागत से बनाए गए तीन परकोलेशन टैंक

जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत पौड़ी माल का मामला

डिंडोरी। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़ी माल में मनरेगा योजना के तहत लाखों की लागत से किसानों की निजी भूमि में परकोलेषन टेंक का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया है जिसकी भूमि स्वामी द्वारा षिकायत जिला स्तर से लेकर सीएम हेल्पलाईन में दर्ज कराई गई है। ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण पूर्व प्रस्ताव और नक्षा खसरा शासकीय भूमि का प्रस्तुत कर स्वीकृति कराई गई वहीं तकनीकी अमला द्वारा बगैर मौके का निरीक्षण किये तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई। निर्माण कार्य के बाद किसानों द्वारा जब षिकवा षिकायत शुरू की गई जिसके बाद ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और तकनीकी अमले की चूक सामने आई है। अब ग्राम पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक मामले में लीपापोती करने की जुगत लगाई जा रही है। हालांकि ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव जोहन लाल कोरबा और रोजगार सहायक भगत लाल हथेष्वर सफाई देते फिर रहे हैं वहीं तकनीकी अमला भी अपने कारनामें को छुपाने की कवायद शुरू कर दी है। हालांकि किसान अब कार्रवाई का मन बना लिये हैं वहीं ग्रामीण भी ग्राम पंचायत की इस करतूत को गैर जिम्मेदाराना रवैया करार दे रहे हैं। ग्राम पंचायत अंतर्गत पौडी माल, नयेगांव माल, और गोयरा रैयत में लाखों की लागत से निर्माण करा दिया गया। और शासकीय राषि का दुरुपयोग किया गया है। शिकायत के बाद प्रशासन जांच की बात कर रहा है।

आखिर क्यों बनाए जाते है परकोलेशन टैंक

विभागीय जानकारी के अनुसार गांव में पानी संग्रहण के लिए मनरेगा योजना से शासकीय जमीन पर परकोलेशन टैंक बनाने का प्रावधान है ताकि सभी ग्रामीण पानी का उपयोग कर सके। लेकिन सरपंच ,सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से टैंक का निर्माण निजी जमीन पर करवा दिया गया, ग्राम पंचायत अंतर्गत पौंडी माल, नयेगांव माल, और गोयरा रैयत में लाखों रुपये की लागत से परकोलेशन टैंक का निर्माण कराया गया जिसमें नयेगांव रैयत और पौडी माल में एक ही नक्षा खसरा से पृथक-पृथक तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति दिनांक और लागत दोनों परकोलेशन टैंक में अलग-अलग दर्शाई गई है।

भूमि स्वामी की बगैर सहमति के कराया गया निर्माण कार्य

मनरेगा योजना से कराये गये परकोलेषन टेंक निर्माण किसानों की निजी भूमि में कराये गये हैं लेकिन निर्माण पूर्व भूमि स्वामियों से किसी तरह की सहमति नहीं ली गई है। नएगांव के किसान बालक राम नागेश ने बताया कि मेरी मां के नाम से जंगल किनारे लगभग 35 डिसमिल जमीन है उसमें हमारे द्वारा कृषि कार्य किया जाता है। लेकिन मैं काम करने बाहर चला गया, इस दौरान ग्राम पंचायत ने बगैर सहमति लिए ही टैंक बनवा दिया, जब मैं गांव वापस आया तो इसकी जानकारी लगी जिसके बाद षिकायत दर्ज कराई गई वहीं पोड़ी माल में शांति धाम के पास अजय पिता चेतन के खेत में और गोयरा गांव में ब्रम्हा बाई पति धरम सिंह, और नयेगांव माल में तिजिया बाई पति नेमीलाल के खेत में बना दिए गए है।

पहली ही बारिश में नहीं टिक पाया परकोलेशन टैंक

ग्राम पंचायत अंतर्गत वर्ष 2022-23 जनवरी एवं फरवरी माह में तीन परकोलेषन टेंक स्वीकृत हुये थे। शिकायत कर्ता चंद्रिका गोस्वामी ने बताया कि गोयरा में 9 लाख 9 हजार 978 रुपए, पोड़ी मॉल में 10 लाख 72 हजार 547 रुपए, और नएगांव में 9 लाख 99 हजार रुपए जून 2023 के महीने में निकाल लिए गए। लेकिन पौडी माल में निर्मित परकोलेषन टेंक में वेस्ट वेयर का निर्माण नहीं कराये जाने के कारण पहली की बारिष में बंड क्षतिग्रस्त हो गई जिसकी जांच जनपद स्तरीय टीम द्वारा की गई ओर प्रतिवेदन जिला पंचायत में प्रस्तुत किया गया न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी विहित प्राधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा निर्माण कार्य में गडबडी पाते हुये ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव और तकनीकी अमला को दोषी करार देते हुये लगभग 77 हजार रूपये का देयता अधिरोपित किया ओर सभी जिम्मेदारों से पृथक-पृथक राषि निर्धारित की गई।

आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी

परकोलेशन टैंक निर्माण में अनियमितता सामने के आने के बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां भूमि स्वामी द्वारा बगैर सहमति के निर्माण कार्य का आरोप लगाया जा रहा है वहीं ग्राम पंचायत की सरपंच बिस्मतिया बाई भी कम पढी लिखी होने का हवाला दे रही हैं इसके साथ ही तकनीकी अमला भी निर्माण कार्य सरकारी भूमि में कराने का दावा कर रहे हैं हालांकि ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव जोहन लाल कोरबा और रोजगार सहायक भगत लाल हथेष्वर मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन शिकायतकर्ता और भूमि स्वामी इस मामले की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ।

इनका कहना है

मजदूरी करने जिले से बाहर गया हुआ था इसी दौरान मेरी मां के स्वामित्व की भूमि में बगैर सहमति के परकोलेशन टैंक का निर्माण कराया गया है।

बालकराम, किसान

शासकीय राशि से बगैर सहमति के निजी भूमि में टैंक का निर्माण कराया गया है जिसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये।

चंद्रिका गोस्वामी, शिकायतकर्ता

सरकारी भूमि पर ही परकोलेशन टैंक का निर्माण कराया गया है निर्माण स्थल से सटी हुई किसानों की भूमि है।

कमलेश धूमकेती, तत्कालीन उपयंत्री

मामला संज्ञान में आया है इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाये जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की जायेगी।

प्रमोद ओझा, प्रभारी सीईओ, जनपद पंचायत डिंडौरी

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