शान से लहराया तिरंगा, पर फैसलों पर उठे सवाल

डिंडोरी पुलिस परेड मैदान, डिंडौरी में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के शान से लहराते ही वातावरण देशभक्ति, अनुशासन और उत्साह से भर उठा। परेड की सधी हुई चाल, आकर्षक झांकियों की जीवंत प्रस्तुति और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को भव्यता प्रदान की। बच्चों, युवाओं और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रप्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म और अनुशासन में भी झलकता है।सुबह से ही परेड मैदान में जनसमूह उमड़ पड़ा। स्कूली टुकड़ियों की सुसंगठित परेड, सामाजिक संदेश देती झांकियां और मंच पर प्रस्तुत लोकनृत्य, गीत-संगीत ने दर्शकों को बांधे रखा। हर प्रस्तुति में परिश्रम, अभ्यास और समर्पण साफ दिखाई दे रहा था। आयोजकों की व्यवस्थाएं भी प्रशंसनीय रहीं, जिससे कार्यक्रम अनुशासित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।लेकिन इस उत्सव के बीच एक टीस भी दिखाई दी। परेड, झांकियों और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के निर्णायक निर्णयों को लेकर कई प्रतिभागी असंतुष्ट नजर आए। कहीं चेहरे पर मायूसी थी, तो कहीं आंखों में आंसू छलकते दिखे। मेहनत और तैयारी के बाद अपेक्षित परिणाम न मिलने का दर्द स्वाभाविक है, परंतु प्रतियोगिताओं की विश्वसनीयता का आधार निष्पक्ष और पारदर्शी निर्णय ही होता है। यह आवश्यक है कि ऐसे आयोजनों में निर्णायक प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी हो, ताकि प्रतिभागियों का मनोबल टूटे नहीं और उनकी मेहनत को सम्मान मिले। राष्ट्रीय पर्वों का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि एकता, विश्वास और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। डिंडौरी का यह आयोजन भव्यता और देशभक्ति का प्रतीक बना, पर साथ ही यह संदेश भी दे गया कि व्यवस्थाओं के साथ-साथ निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। तभी ऐसे समारोह वास्तव में प्रेरणा और गर्व का स्रोत बन पाते हैं।











