हेलीपैड में लापरवाही बनी बाधा, 5 से 7  मिनट आसमान में मंडराती रही एयर एम्बुलेंस,,, पायलट ने अधिकारियों से कहा ऐसी हेलीपैड तो में पहली दफा देखा जिसके चारों तरफ तार हैं 

हेलीपैड में लापरवाही बनी बाधा, 5 से 7  मिनट आसमान में मंडराती रही एयर एम्बुलेंस

पायलट ने अधिकारियों से कहा ऐसी  हेलीपैड तो में पहली दफा देखा है जिसके चारों तरफ तार हैं 

डिंडौरी ,,जिले में एक ओर प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता देखने को मिली, तो दूसरी ओर बुनियादी व्यवस्थाओं की गंभीर लापरवाही भी उजागर हो गई। रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर से पीड़ित 21 वर्षीय युवती कीर्ति चंदेल को एयर एम्बुलेंस से भोपाल एम्स भेजने के दौरान पुलिस ग्राउंड स्थित हेलीपैड की खामियां सामने आईं। हेलीपैड के आसपास बिजली के तार लटके होने के कारण एयर एम्बुलेंस करीब 15 मिनट तक आसमान में मंडराती रही। हेलिकॉप्टर के पायलट संजय शर्मा ने सुरक्षित लैंडिंग में आ रही बाधाओं को देखते हुए अधिकारियों से कड़ा सवाल किया। उन्होंने कहा, “हेलीपैड के आसपास बिजली के तार क्यों लटक रहे हैं? ऐसा हेलीपैड मैंने पहली बार देखा है। यह बेहद खतरनाक है।” पायलट की आपत्ति के बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्काल हेलीपैड के आसपास से तार हटवाए गए। इसके बाद हेलिकॉप्टर की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकी।

जिला अस्पताल से भोपाल एम्स तक जीवन रक्षक उड़ान

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अमरपुर विकासखंड के ग्राम पिपरिया निवासी कीर्ति चंदेल पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिजनों के अनुसार, कीर्ति ने बीएससी की पढ़ाई पूरी कर ली थी और एमएससी के लिए आवेदन की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान जून माह में अचानक उसकी कमर के नीचे तेज दर्द शुरू हुआ। कई स्थानों पर इलाज कराने के बाद रायपुर एम्स में जांच में सामने आया कि उसकी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर है। रायपुर एम्स में ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक उसकी हालत में सुधार हुआ और वह घर लौट आई। लेकिन 5 जनवरी की शाम अचानक दर्द फिर से असहनीय हो गया। परिजन उसे तत्काल डिंडौरी जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए भोपाल एम्स रेफर करने का निर्णय लिया।

सड़क मार्ग से ले जाना संभव नहीं

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि मरीज की हालत ऐसी थी कि सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करना जोखिम भरा हो सकता था। इसी कारण भोपाल एम्स से समन्वय कर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि एयर एम्बुलेंस में विशेषज्ञ मेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है और मरीज के परिवहन व उपचार की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीज का संपूर्ण इलाज किया जाएगा।

समय बदला, उड़ान रद्द हुई, फिर सुबह हुआ एयरलिफ्ट

जानकारी के अनुसार एयर एम्बुलेंस को बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे डिंडौरी पहुंचना था, लेकिन समय बदलकर ढाई बजे कर दिया गया। इसके बाद तकनीकी कारणों से उड़ान रद्द हो गई। अंततः गुरुवार सुबह 10.45 बजे कीर्ति चंदेल को एयरलिफ्ट कर भोपाल एम्स भेजा गया।

पहली बार बना ग्रीन कॉरिडोर

मरीज को जिला अस्पताल से हेलीपैड तक सुरक्षित और तेज़ी से पहुंचाने के लिए प्रशासन ने लगभग एक किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया। ट्रैफिक निरीक्षक सुभाष उईके ने बताया कि पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि एम्बुलेंस को कहीं भी रुकना न पड़े। उन्होंने बताया कि डिंडौरी में यह पहला अवसर है जब किसी मरीज को एयर एम्बुलेंस से ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

एयरलिफ्ट के दौरान कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, एसडीएम भारती मरावी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज पांडेय सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पुलिस ग्राउंड में मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे।

हेलीपैड की सुरक्षा पर उठे सवाल

हेलीपैड की स्थिति को लेकर पीडब्ल्यूडी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री एम.एस. धुर्वे ने बताया कि पुलिस ग्राउंड स्थित हेलीपैड विभाग द्वारा बनाया गया है और आमतौर पर वीआईपी मूवमेंट के समय उपयोग में लिया जाता है। हाल ही में ग्राउंड में लाइट के लिए पोल लगाए गए थे, जिनके तार हेलीपैड के आसपास आ गए।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर को पत्र लिखा जा रहा है, ताकि या तो पोल शिफ्ट किए जाएं या किसी खुले और सुरक्षित मैदान में नया हेलीपैड विकसित किया जाए। सुरक्षा मानकों को देखते हुए मौजूदा ग्राउंड में दोबारा लैंडिंग की अनुमति देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

संवेदनशीलता के साथ व्यवस्था सुधार की जरूरत

यह घटना एक ओर प्रशासन की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसने समय रहते मरीज को एयर एम्बुलेंस से उच्च संस्थान पहुंचाया, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट करती है कि जिले में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा मानकों में सुधार की सख्त जरूरत है। भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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