आठ सो के चार लड्डू,तीन सो के तीस बंडल बीड़ी पर उठ रहे सवाल,,क्या यही है सरकार की नशा मुक्ति अभियान

डिंडोरी। जनपद पंचायत मेहदवानी अंतर्गत ग्राम पंचायत डोकरघाट में जिम्मेदारों ने गजब कारनामा कर दिखाया है, कागजी खेल खेलते हुये पंचायत के नुमाइंदों ने आठ सौ रूपये में मात्र चार लड्डू खरीदी दिखाकर पंचायत का माखौल बना दिया है। ग्राम विकास के लिये आने वाली राषि का जिम्मेदारों ने इसे मौज-मस्ती और निजी सुख-सुविधाओं में खर्च करने से भी नहीं चूक रहे हैं। ग्राम पंचायत के द्वारा खर्च की गई राषि के लगाये गये बिल की पडताल करने पर जो मामला प्रकाष में आया है, वह हैरान करने वाला है। आठ सौ रूपये में महज चार लड्डू खरीदे गये हैं यानी एक लड्डू की कीमत दो सौ रुपये बतलाई गई है। इसके साथ ही तीस बंडल बीड़ी तीन सौ रूपये में खरीदे जाने का भी बिल लगाया गया है। सवाल यह है कि ग्राम विकास की राशि आखिर मिठाई और धूम्रपान पर खर्च करना कितना लाजिमी है। जो राषि ग्राम पंचायत की मूलभूत सुविधाओं और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आई थी, लेकिन ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने एक लड्डू को दो सौ रुपये क्रय दिखाकर सीधे-सीधे फर्जीवाड़ा किया है और जब बात तीस बंडल बीड़ी की आती है तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि शासन जहां नशामुक्ति अभियान के तहत तमाम जनजागरूकता अभियान चलाकर नषे से दूर रहने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं ग्राम पंचायत के नुमाइंदे शासन की मंषा पर पानी फेर रहे हैं। उसी शासन की राशि से पंचायत के जिम्मेदार बीड़ी खरीद कर धुएं में उड़ाते दिख रहे हैं। यह केवल नियमों का उल्लंघन ही नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ सीधा विश्वासघात है। जनता के पैसे से बीड़ी खरीदी जाएगी, धूम्रपान किया जाएगा और मिठाई खाई जाएगी तो फिर विकास कार्य कहां से होंगे, पंचायत में योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे होगा। ग्राम पंचायत डोकरघाट का यह मामला साफ तौर पर बताता है कि जिम्मेदारों को शासन की योजनाओं से कोई लेना देना नहीं और शासन की राषि को निजी धन मानकर मनमाने तरीके से उपयोग करना फितरत में शामिल हो गया है। इस पूरे मामले में जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है क्योंकि अगर सचिव और सरपंच मिलकर ऐसे बिल पास कर रहे हैं और अधिकारी उसकी जांच नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब यही है कि पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ काफी गहरी है। यह खर्च केवल कागजों में दिखा कर राशि गबन करने का तरीका भी हो सकता है क्योंकि इतना महंगा लड्डू और बीड़ी जैसी सामग्री विकास कार्यों की श्रेणी में नहीं आतीं। यह भ्रष्टाचार केवल आर्थिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं है यह पंचायती राज को बदनाम करना है। अब देखना होगा कि प्रषासन द्वारा ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।
सच का सामना न्यूज आपको रखे आगे #










