हादसे में टूटा युवक का पैर, अस्पताल में डॉक्टर गायब — 3 घंटे तक दर्द से तड़पता रहा घायल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

हादसे में टूटा युवक का पैर, अस्पताल में डॉक्टर गायब — 3 घंटे तक दर्द से तड़पता रहा घायल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

कलेक्टर की सख्ती के बावजूद नहीं सुधर रहे हालात, समनापुर स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही ने खोली सिस्टम की पोल

डिंडोरी – जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर जिला कलेक्टर द्वारा लगातार औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करने की चेतावनी दी जा रही है, लेकिन दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। समनापुर विकासखंड से सामने आई एक घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल में घंटों तक इलाज के लिए तड़पना पड़ा, क्योंकि अस्पताल में डॉक्टर ही मौजूद नहीं थे।

घटना से जुड़े प्रमुख बिंदु :

• तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह –
समनापुर विकासखंड के अतरिया ग्राम निवासी 25 वर्षीय धर्मेंद्र कुशराम अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान कूड़ा से समनापुर की ओर तेज रफ्तार से आ रही डिजायर कार और बाइक के बीच जोरदार टक्कर हो गई।

भीषण टक्कर में युवक गंभीर घायल –
हादसा इतना भीषण था कि धर्मेंद्र कुशराम का पैर टूट गया और वह सड़क पर गंभीर हालत में गिर पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

• 108 एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया –
मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल डायल 108 एंबुलेंस को सूचना दी। एंबुलेंस के माध्यम से घायल युवक को समनापुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।

• अस्पताल में नहीं मिला डॉक्टर –
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी घायल युवक को तुरंत इलाज नहीं मिल पाया, क्योंकि उस समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।

• तीन घंटे तक दर्द से तड़पता रहा युवक –
बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे तक घायल युवक दर्द से कराहता रहा, लेकिन अस्पताल में कोई जिम्मेदार डॉक्टर इलाज के लिए मौजूद नहीं था।

• परिजन और ग्रामीण भटकते रहे –
घायल युवक के परिजन और साथ आए ग्रामीण डॉक्टर को ढूंढते रहे, लेकिन उन्हें सिर्फ इंतजार ही करना पड़ा।

• कलेक्टर के निरीक्षण के बावजूद लापरवाही –
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब जिला कलेक्टर लगातार अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य विभाग को सुधारने की कोशिश कर रही हैं। इसके बावजूद अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

• स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल –

इस घटना ने साफ कर दिया कि सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं अभी भी कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

• जनता के मन में उठ रहे सवाल –

अगर अस्पतालों में डॉक्टर ही मौजूद नहीं रहेंगे तो गंभीर मरीजों का इलाज कैसे होगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

इस पूरे मामले ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है या फिर मरीजों की जिंदगी इसी तरह सिस्टम की लापरवाही के भरोसे चलती रहेगी

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