उपयंत्री का निर्माण कार्यों में 10 % कमीशन तय,स्टिंग वीडियो का एडिशनल सीईओ और एसडीएम करेंगे जांच

उपयंत्री का निर्माण कार्यों में 10 % कमीशन तय,स्टिंग वीडियो का एडिशनल सीईओ और एसडीएम करेंगे जांच

जनपद पंचायत डिंडोरी के ग्राम पंचायत तेन्दुमेर मोहतरा का मामला

सचिव का दावा – उपयंत्री का 10% कमीशन फिक्स

जिला पंचायत सीईओ ने की जांच टीम गठित

डिंडौरी। जनपद पंचायत डिंडौरी के ग्राम पंचायत तेन्दुमेर मोहतरा में सरपंच सचिव – सचिव और उपयंत्री के द्वारा निर्माण कार्यो में की गई गड़बड़ी को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित की जा रही है। इसी बीच सच का सामना के टीम द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया है,जिसमें सचिव कमल सिंह पट्टा के द्वारा उपयंत्री पर 10 % कमीशन लेने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के द्वारा जांच कराने की बात कही गई थी। वहीं अब मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत सीईओ के द्वारा वायरल वीडियो की जांच करने के लिए दो सदस्यीय टीम गठित किया गया है।

 

जिसमे से अतिरिक्त मुख्यकार्यपालन अधिकारी पंकज जैन और एसडीएम रामबाबू देवांगन शामिल है। जांच टीम को 3 दिवस के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

ये है पूरी मामला

जनपद पंचायत डिंडौरी के ग्राम पंचायत तेन्दुमेर मोहतरा से 10 प्रतिशत कमीशन का मामला सामने आया है। यह न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। पंचायत सचिव कमल सिंह पट्टा से स्टिंग के दौरान अपने ही पंचायत के उपयंत्री पर कमीशन लेने का आरोप लगाना अत्यंत चिंताजनक है। यदि यह आरोप सत्य सिद्ध होता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का संकेत है।  सचिव ने स्पष्ट रूप से दावा किया है कि उपयंत्री का 10 प्रतिशत कमीशन तय है, जो कथित रूप से उच्च अधिकारियों तक पहुंचता है। यह आरोप शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरा आघात करता है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के लोंगो तक पहुंचे। लेकिन यदि निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी हावी होगी, तो विकास की गति अवरुद्ध होना स्वाभाविक है।सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन अधिकारियों को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पंचायतों का संचालन करना चाहिए, उन्हीं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना जनता के विश्वास को कमजोर करता है। यह मामला केवल तेन्दुमेर मोहतरा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रही है।  अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराएं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी जनहित की राशि पर डाका डालने का साहस न कर सके।

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