महिला आरक्षण बिल गिरा—सरकार की मंशा बेनकाब, लोकतंत्र से खिलवाड़: पुष्पेंद्र सिंह
बहुमत के बिना बिल लाकर देश को गुमराह किया, महिला अधिकारों पर राजनीति का आरोप

मैहर। महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह पहले से तय था कि सरकार के पास आवश्यक विशेष बहुमत नहीं है, फिर भी बिल लाकर देश की महिलाओं और जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे को भी सरकार ने राजनीतिक स्टंट बना दिया है। “जब संख्या नहीं थी तो बिल क्यों लाया गया? सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट और राजनीतिक दिखावा करने के लिए ?” आगे कहा कि संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, और वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट था कि बिना विपक्ष के सहयोग के बिल पास नहीं हो सकता। “यह सरकार की नीयत नहीं, रणनीति थी—महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक खेल” पुष्पेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण को डीलिमिटेशन से जोड़कर पूरे मुद्दे को उलझाया, ताकि असली मंशा छिपाई जा सके। “डीलिमिटेशन के जरिए सीटों का गणित बदलने की तैयारी थी, जिसमें कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान होता—यानी लोकतांत्रिक संतुलन से सीधा खिलवाड़” उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि सरकार गंभीर मुद्दों पर भी सिर्फ राजनीतिक लाभ देखती है, न कि ठोस समाधान। “महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य* जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बड़े-बड़े विषय उछाले जाते हैं” अंत में पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि *महिला आरक्षण बिल जो कि 2023 में पास हो चुका है बिना किसी शर्त के तुरंत लागू होना, पर इसे डीलिमिटेशन जैसी प्रक्रियाओं से अलग रखा जाए। महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति बंद होनी चाहिए।











