सूखे पौधे, सोता प्रशासन: डिंडोरी में हरियाली योजना पर बड़ा सवाल

सूखे पौधे, सोता प्रशासन: डिंडोरी में हरियाली योजना पर बड़ा सवाल

डिंडोरी जिले में पौधारोपण के नाम पर जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, वह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की गंभीर विफलता को उजागर करती है। कागजों में हजारों पौधे रोपे जाने के दावे किए गए, योजनाओं का ढिंढोरा पीटा गया, फोटो सेशन हुए, लेकिन जब हकीकत देखने की बारी आई, तो जमीन पर सूखे और मुरझाए पौधों के अलावा कुछ नजर नहीं आया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लगाए गए पौधे आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। न समय पर पानी मिला, न सुरक्षा के इंतजाम किए गए और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने यह जानने की कोशिश की कि जिन पौधों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, उनका हाल क्या है। आखिर यह कैसी योजना थी, जिसमें रोपण तो हुआ लेकिन संरक्षण पूरी तरह गायब रहा? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पूरा अभियान सिर्फ कागजी आंकड़े बढ़ाने और वाहवाही लूटने के लिए चलाया गया था? अगर नहीं, तो फिर पौधों की देखरेख के लिए तय बजट कहां गया? किसने इसकी निगरानी की? और आज जब पौधे सूख चुके हैं, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस बात का इंतजार कर रहे हैं? क्या उन्हें इन सूखे पौधों में बर्बाद हुआ सरकारी पैसा नजर नहीं आता? क्या पर्यावरण संरक्षण सिर्फ भाषणों और कागजों तक ही सीमित रह गया है? अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, खर्च हुए हर रुपये का हिसाब तय करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। क्योंकि अगर अब भी जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि हरियाली के नाम पर चल रहा यह खेल आगे भी यूं ही जारी रहेगा—और इसकी कीमत चुकाएगी पर्यावरण।

Leave a Comment

Read More