प्रतिबंध के बावजूद बेखौफ बोरिंग: जब्त मशीन फिर मैदान में,आमपुर के बाद अब मेहदवानी में कब्जा ,,,,,नियमों की उड़ी धज्जियां: जब्त बोरवेल वाहन से फिर अवैध खनन

प्रतिबंध के बावजूद बेखौफ बोरिंग: जब्त मशीन फिर मैदान में,आमपुर के बाद अब मेहदवानी में कब्जा

नियमों की उड़ी धज्जियां: जब्त बोरवेल वाहन से फिर अवैध खनन

डिंडोरी जिले में अवैध नलकूप खनन पर प्रतिबंध के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक सख्ती और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जल संकट को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया द्वारा 6 फरवरी 2026 को जिले को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए निजी नलकूप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद अवैध गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मामला अमरपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत वन ग्राम झरना घुघरी का है, जहां रात के समय धड़ल्ले से अवैध नलकूप खनन किया जा रहा था। शिकायत मिलने पर वन विभाग की अमरपुर टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए बोरवेल मशीन को जब्त कर पुलिस चौकी के हवाले कर दिया था। जांच में पाया गया कि संबंधित वाहन के पास नलकूप खनन की कोई वैध अनुमति नहीं थी। इस पर बोरिंग मशीन वाहन क्रमांक KA59M0249 एवं सपोर्ट वाहन KA01MF6559 के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी हालात में सुधार नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला मेहदवानी जनपद मुख्यालय का है, जहां रेस्ट हाउस के पीछे खुलेआम उसी बोरिंग मशीन से नलकूप खनन किए जाने की जानकारी सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि यह सब जिम्मेदार विभागों की नजरों के सामने हो रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जमीनी हकीकत यह दर्शाती है कि प्रशासनिक आदेशों का पालन सुनिश्चित करने में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है। एक ओर प्रशासन जल संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंध के बावजूद इस तरह की गतिविधियों का जारी रहना नियमों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच करेंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कागजों तक सीमित रह जाएगा। जिले में बढ़ते जल संकट के बीच इस प्रकार की लापरवाही भविष्य में और गंभीर परिणाम ला सकती है, जिसे नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए भारी पड़ सकता है।

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