राम-कृष्ण को बांटकर सियासत कर रही भाजपा: पुष्पेंद्र सिंह

राम-कृष्ण को बांटकर सियासत कर रही भाजपा: पुष्पेंद्र सिंह

धीरेंद्र शास्त्री के बयान के पीछे राजनीतिक मंशा पर उठाए सवाल, उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों से जोड़कर देखने की जरूरत बताई।

मैहर। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति अब धर्म और जाति के ध्रुवीकरण तक सिमटती दिखाई दे रही है। सत्ता हासिल करने के लिए अब भगवानों के नाम और समाज की धार्मिक भावनाओं को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों के आराध्य हैं। ऐसे में दोनों के बीच तुलना करते हुए ‘हमारे’ और ‘तुम्हारे’ जैसी भाषा का इस्तेमाल करना आखिर किस मानसिकता को दर्शाता है? भगवान श्रीकृष्ण को यादव समाज की आस्था और विरासत से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस तरह के बयान का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव समझना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरणों के बीच क्या इस तरह के बयान यादव समाज और दूसरे हिंदू समुदायों के बीच अलग-अलग धार्मिक पहचान का भाव पैदा करने की कोशिश हैं? क्या भाजपा को अपने राजनीतिक हित साधने के लिए अब हिंदू समाज के भीतर ही जातीय आधार पर विभाजन की जरूरत पड़ रही है? पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा की राजनीति का तरीका जनता से छिपा नहीं है। जब रोजगार, महंगाई, किसानों की समस्याओं, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सवाल उठते हैं, तब बहस को धर्म और जाति की तरफ मोड़ दिया जाता है। कभी मंदिर-मस्जिद, कभी हिंदू-मुस्लिम और अब भगवान श्रीराम तथा श्रीकृष्ण के नाम पर अलगाव की आशंका! आखिर जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा कब होगी? उन्होंने कहा कि मायावती और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं की राजनीतिक भूमिका और उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरणों के बीच भाजपा को भी पता है कि धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में धीरेंद्र शास्त्री के बयान को उत्तर प्रदेश के चुनावी संदर्भ से अलग रखकर देखना कई सवाल खड़े करता है। पुष्पेंद्र सिंह ने भाजपा से सवाल किया कि क्या धीरेंद्र शास्त्री के बयान को भाजपा का राजनीतिक समर्थन प्राप्त है? यदि नहीं, तो भाजपा ऐसे बयानों पर अपना स्पष्ट पक्ष जनता के सामने क्यों नहीं रखती? धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिशों पर भी सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण किसी एक जाति के नहीं और भगवान श्रीराम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। यादव समाज को भगवान कृष्ण के नाम पर और दूसरे समाजों को भगवान राम के नाम पर बांटने की कोशिश देश की सामाजिक एकता के लिए उचित नहीं है।

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