मोहन सरकार में वेंटिलेटर पर एम्बुलेंस और जननी वाहन योजना
समय पर नहीं मिल रही 108 सेवा, 11 में से 5 एम्बुलेंस खड़ी खराब

डिंडौरी। प्रदेश सरकार जहां सड़क हादसों में घायल लोगों को “गोल्डन ऑवर” के भीतर उपचार उपलब्ध कराने और समय पर अस्पताल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में 108 एम्बुलेंस एवं जननी वाहन योजना खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। जिले में एम्बुलेंस सेवाओं की बदहाल स्थिति के चलते गंभीर मरीजों और दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर वाहन नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवाओं में बड़ी संख्या में वाहन खराब पड़े हुए हैं। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करने के बाद भी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो रही और मजबूरी में परिजनों को निजी वाहनों का सहारा लेकर जबलपुर मेडिकल कॉलेज तक मरीजों को पहुंचाना पड़ रहा है।
11 में से 5 एम्बुलेंस खराब
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में 2 एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) और 9 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) 108 एम्बुलेंस वाहन उपलब्ध हैं। इनमें से 5 बीएलएस वाहन तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस के अभाव में लंबे समय से बंद पड़े हुए हैं। वहीं जननी वाहन योजना के अंतर्गत जिले को कुल 18 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से 6 वाहन खराब बताए जा रहे हैं।
खराब वाहनों की स्थिति भी सवाल खड़े कर रही है। जानकारी के मुताबिक एक वाहन ज्योति पेट्रोल पंप के पास पंचर हालत में खड़ा है, दूसरा बिलैया पेट्रोल पंप में तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा हुआ है। वहीं दो वाहन कोतवाली थाना परिसर में मेंटेनेंस के अभाव में खड़े हैं और एक अन्य वाहन किशोरी गार्डन के पास लंबे समय से बंद स्थिति में रखा हुआ है।
मेंटेनेंस पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एम्बुलेंस संचालन करने वाली एजेंसी द्वारा वाहनों के नियमित मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। समय पर सर्विसिंग और मरम्मत नहीं होने के कारण लगातार वाहन खराब हो रहे हैं, जिसका सीधा असर मरीजों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से सीमित हैं। ऐसे में 108 जैसी आपातकालीन सेवा का प्रभावित होना आम लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला अस्पताल तक पहुंचना ही मुश्किल होता है, ऊपर से रेफर मरीजों को समय पर एम्बुलेंस न मिलना व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
छह घंटे तक इंतजार करता रहा घायल
एम्बुलेंस व्यवस्था की बदहाली का ताजा मामला शाहपुर निवासी 26 वर्षीय सब्जी विक्रेता अजय कछवाह का सामने आया है। बताया गया कि अजय कारोपानी क्षेत्र में अपने काम से गया हुआ था, जहां एक तेज रफ्तार अर्टिगा कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल अजय को पहले गाड़ासरई स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
जिला अस्पताल में हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, लेकिन शाम करीब 4 बजे से रात 10 बजे तक 108 एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। आखिरकार परेशान परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था कर घायल को इलाज के लिए जबलपुर रवाना किया।
जिम्मेदारों के दावों पर उठ रहे सवाल
मामले को लेकर जब डिस्ट्रिक्ट मैनेजर अमित उसराठे से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि “आज सात रेफर मरीजों को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से जबलपुर पहुंचाया गया है।” हालांकि जमीनी हालात और खराब पड़े वाहनों की संख्या जिम्मेदारों के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर वाहनों का मेंटेनेंस कराया जाता तो मरीजों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक जिले की जनता बदहाल एम्बुलेंस व्यवस्था का खामियाजा भुगतती रहेगी और कब तक गंभीर मरीज समय पर इलाज के लिए संघर्ष करते रहेंगे।










