महंगे दर पर खरीदे मरियल पौधे, हितग्राही महिलाओं को प्रशिक्षित भी नहीं किया गया,,,,,, योजना के क्रियान्वयन में जमकर बरती गई अनियमितताएं,,बगिया फलने से पहले ही सूख गई

महंगे दर पर खरीदे मरियल पौधे, हितग्राही महिलाओं को प्रशिक्षित भी नहीं किया गया,,,,,,

योजना के क्रियान्वयन में जमकर बरती गई अनियमितताएं,,बगिया फलने से पहले ही सूख गई

डिंडौरी। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा करने वाली एक बगिया मां के नाम योजना में बरती गई प्रशासनिक अनियमितताओं का बगिया को फूलने के पहले की सूखने में अहम योगदान सामने आ रहा है। पहले बैमौसम में पौधों की सप्लाई, फिर विरोध के बावजूद महिलाओं को घटिया स्तर के पौधे थमाने की प्रशासनिक करतूत के बाद अब एक और बडी गडबडी उजागर हुई है। जानकारी के मुताबिक निजी स्वार्थ के चलते जिम्मेदारों ने महंगी दर पर पौधों की एक तरफा खरीदी की थी। जिसने न केवल सिर्फ महिला हितग्राहियों को चूना लगाया, बल्कि योजना के तय मापदंडों का भी मजाक बनाकर रख दिया है। इतना ही नहीं बागवानी के लिए महिला हितग्राहियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण का भी ध्यान नहीं रखा गया। इन सभी मानकों को हासिये में रखने से शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर फेल हो गई है। सीधे शब्दों में कहें तो पौधा रोपण की कुदरती मियाद के विपरीत बैमौसम में घटिया पौधों की खरीदी से यह दुर्दशा निर्मित हुई है। गौरतलब है कि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक बगिया मां के नाम योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत जिले में मध्यप्रदेष ग्रामीण आजीविका मिषन के अंतर्गत स्व सहायता समूह की 726 महिला हितग्राहियों का चयन किया था। इन महिलाओं की चयनित भूमि पर पौधों की सुरक्षा के लिहाज से फेंसिंग कराई गई थी और सिंचाई के प्रबंध के दावे किये गये थे। चयनित 726 महिलाओं को जबलपुर की एक ही नर्सरी से पौधे सप्लाई कराये गये थे। इस दौरान प्रशासनिक दलील थी कि पौधे बाजार दर से कम कीमत पर क्रय किये गये हैं, लेकिन बाद में प्रस्तुत किये गये देयकों में पौधों की कीमत बाजार दर से दोगुनी दर्ज की गई है।

बाजार दर से ज्यादा में खरीदी

महिलाओं की आय बढ़ाने की मंशा वाली इस योजना में महिलाओं को जमकर चूना लगाया गया है। हितग्राहियों की खुद की पसंद को दरकिनार रख कर अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी के मुताबिक एक मात्र सप्लायर से बाजार दर से अधिक राशि में पौधे सप्लाई कराये। इसके साथ ही सीसी पोल फेंसिंग वायर की खरीदी में भी जमकर अनियमितताएं बरती गई हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आम का पौधा 120 रुपये, पोल 520 रुपये और तीन सौ मीटर फेंसिंग वायर 10 हजार से अधिक दर पर क्रय किये गये हैं, जो बाजार दर से अधिक हैं।

प्रशिक्षण के नाम पर खानापूर्ति

एक बगिया मां के नाम के तहत रोपित पौधों की उचित देखभाल के लिए चयनित महिला हितग्राहियों को योजना के प्रावधान के मुताबिक दो बार प्रशिक्षण अनिवार्य था। लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। लिहाजा बागवानी की बारीकियों से महिलाएं अंजान रहीं और रोपित पौधे देखभाल के अभाव में पनप नहीं पाये। नियमानुसार कृषि सखी संबंधित नियमित बैंठकें नहीं होने से भी योजना दुर्गति का शिकार हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं की बागवानी के प्रति अनभिज्ञता योजना पर भारी पड गई है।

ऐसे बरती गई लापरवाही

एक बगिया मां के नाम योजना के क्रियान्वयन में कदम-कदम पर प्रशासनिक तकनीकी और वित्तीय अनियमितताएं बरती गई। आधिकारिक तौर पर सिपरी ऐप से भूमि का चयन होना था लेकिन इस बावद महज औपचारिकता पूरी की गई। तकनीकी अमले ने ऐप की जगह खुद ही स्थल चयन कर लिया। इसी तरह 15 सितम्बर तक पौधारोपण करना अनिवार्य था लेकिन दिसंबर में पौधे प्रदाय किये गये। जिससे बेवजह देरी हुई, वहीं प्रावधान के मुताबिक हितग्राही सामग्री चयन हेतु स्वतंत्र थी, बावजूद इसके एक विशेष सप्लायर से अमानक पौधे प्रदाय कराये गये। जिससे पूरी योजना ही खटाई में पड गई। इस दौरान महिला हितग्राहियों ने विरोध भी जताया था लेकिन कागजी खानापूर्ति करके जिम्मेदारों ने इतिश्री कर ली।

 

इनका कहना है

ग्रामीण क्षेत्र में एक बगिया मां योजना में बेमौसम पौधा रोपण करने से पौधे मर चुके हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली यह योजना फेल हो गई है, और आदिवासी महिलाओं का आर्थिक तौर पर शोषण किया गया है। इस मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जावेगी।  

अमान सिंह पोर्ते, राष्ट्रीय महासचिव, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

एक बगिया मां के नाम योजना में यदि अनियमितताएं बरती गई हैं, तो इसकी जांच कराई जायेगी। कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से इस संबंध में जानकारी तलब की जावेगी। इसके बाद जो भी वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी उसके आधार पर जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई की जावेगी।

फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद, डिंडौरी, मंडला

एक बगिया मां के नाम योजना में हमारे द्वारा पौधे क्रय नहीं किये गये हैं। गैप फिलिंग निरंतर तीन सालों तक जारी रहेगी, कृषि सखी के माध्यम से सर्वेक्षण कार्य करवाया गया है। इससे ज्यादा जानकारी देने में मैं असमर्थ हूूं, जो भी जानकारी चाहिए कार्यालय आकर संपर्क करें।

अर्पणा पांडे, जिला परियोजना प्रबंधक एनआरएलएम

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