विरोध के बावजूद थमा दिए घटिया पौधे, सालभर में उजड़ गई ‘मां की बगिया’,,,,,,,, महिलाओं के प्रदर्शन और शासन स्तर पर शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, 726 हितग्राहियों की बगिया में अब सूखे ठूंठ

विरोध के बावजूद थमा दिए घटिया पौधे, सालभर में उजड़ गई ‘मां की बगिया’,,,,,,,,

महिलाओं के प्रदर्शन और शासन स्तर पर शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, 726 हितग्राहियों की बगिया में अब सूखे ठूंठ

डिंडौरी। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा के तहत शुरू की गई महिला हितग्राही मूलक योजना ‘‘एक बगिया मां के नाम‘‘ पर प्रदाय किये पौधों के कुछ दिन में ही सूखकर मर जाने के मामले में बड़ी प्रशासनिक नजरअंदाजी सामने आई है। महिला हितग्राहियों की माने तो उनके विरोध के बावजूद घटिया और मरियल पौधे प्रदाय किये गये थे। जिसकी परिणति यह है कि शासन की महत्वपूर्ण योजना को अमली जामा पहनाने के प्रथम चरण में ही बरती गई, इस प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक बगिया मां के नाम योजना ने साल भर में ही दम तोड दिया और पौधे पनपने के पहले ही मर गए। ऐसा नहीं है कि इसकी भनक प्रशासन को नहीं थी। हितग्राहियों के मुताबिक उन्होंने घटिया और मरियल पौधे की सप्लाई की सूचना तत्काल अधिकारियों को भी दी थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। हालांकि योजना के नाम पर हितग्राही महिलाओं के साथ बरती गई इस गफलत पर जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते ने स्थानीय तौर पर जमकर विरोध जताया था और जिला पंचायत के साथ कलेक्ट्रेट के सामने सूखे पेड़ लेकर प्रदर्शन किया था। तत्कालीन तौर पर इस पूरे मामले की शिकायत राज्य शासन और मनरेगा परिषद को भी की गई थी। जहां से जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन जैसे-जैसे बगिया में पौधे मुरझाते रहे वैसे-वैसे षिकायत और जांच की गति भी धीमी पडती गई। अब स्थिति यह है कि बगिया के नाम पर सूखे ठूंठ और खरपतवार खडे हैं। गौरतलब कि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा 15 अगस्त 2025 से प्रदेश में एक बगिया मां के नाम योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले के प्रति विकासखंड में 100 महिलाओं का बतौर हितग्राही चयन किया गया था। इन महिलाओं की मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व सहायता समूह की सदस्यता अनिवार्य थी। योजना के तहत एनआरएलएम ने जिले के सात विकास खंडों में 726 महिला हितग्राहियों का चयन किया था। जिसके बाद इन महिलाओं की चयनित भूमि पर पौधों की सुरक्षा के लिहाज से फेंसिंग कराई गई थी और सिंचाई के प्रबंध के दावे किये गये थे। वहीं चयनित 726 महिलाओं को जबलपुर की एक ही नर्सरी से पौधे सप्लाई कराये गये थे। इस दौरान बतलाया गया था कि इन्हीं पौधों से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेगी। लेकिन महिलाओं के मेहनत और मंषा पर प्रशासनिक अनियमितताएं भारी पड़ गई।

स्वयं करना था चयन

मनरेगा के तहत महिला हितग्राही मूलक इस योजना में प्रावधान था कि हितग्राही पौधों एवं विक्रेता चयन हेतु स्वतंत्र थी। लेकिन अन्य मानकों के साथ इस प्रावधान को भी हासिये में रख प्रशासन ने एक खास नर्सरी को 726 हितग्राहियों को पौधे प्रदाय हेतु करार कर लिया। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि बाजार दर से कम कीमत पर पौधे सप्लाई की जा रही है, लेकिन दर के साथ पौधे की गुणवत्ता में भी गड़बड़ी करके महिलाओं को घटिया पौधे थमा दिये थे। जानकारी के मुताबिक प्रति हितग्राही लगभग पौने दो लाख से अधिक की राशि खर्च की गई है।

मनरेगा परिषद के संज्ञान में मामला

आदिवासी बाहुल डिंडौरी जिले में 726 महिला हितग्राहियों को झांसे में लेकर बड़े पैमाने पर बरती गई अनियमितता संबंधी समाचार प्रकाशन के बाद इस मामले को मनरेगा परिषद ने भी संज्ञान में लिया था। लगभग 14 करोड़ की लागत वाली एक बगिया मां के नाम योजना में पौधों के साथ ही फेंसिंग पोल, तार खाद की भी की गई थी। लेकिन जानकारी के अनुसार क्रय की गई सामग्री डीपीआर के दर से भी अधिक बतलाई गई है। जो सामग्री खुले बाजार में कम दामों में क्रय की जा सकती थी, वह निर्धारित दर से अधिक में क्रय की गई है, इससे साफ जाहिर होता है कि मिलीभगत करते हुए योजना में कैसा पलीता लगाया गया है।

इनका कहना है

योजना के अंतर्गत हमको सूखे और मरियल पौधे प्रदाय किये गये थे। जिसकी शिकायत फौरन ही हमने अधिकारियों से की थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद हमने पूरे मामले की शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष से की थी और उनके साथ सूखे पौधे लेकर जिला पंचायत और कलेक्ट्रेट में विरोध भी जताया था।

ज्ञानवती बाई, सरस्वती स्व-सहायता समूह ग्राम माधोपुर

 

तत्कालीन समय में समूह की महिलाओं द्वारा मेरे समक्ष घटिया पौधा प्रदाय करने की शिकायत की गई थी। मौके पर जाकर मेरे द्वारा निरीक्षण किया था, घटिया पौधों की सप्लाई पर मैंने आपत्ति जताते हुये विरोध प्रदर्शन किया था। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु पुनः शासन को पत्र लिखा जावेगा।

रूदेश परस्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला डिंडौरी

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