तेंदूमेर मोहतरा में सीसी सड़क में घोटाला: जांच के नाम पर लीपापोती, हफ्तों बाद भी जिला पंचायत की टीम नहीं कर पाई जांच

डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदूमेर मोहतरा में सीसी सड़क निर्माण में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां सरपंच, सचिव और उपयंत्री की मिलीभगत से लाखों रुपए की लागत से बनाई गई सीसी सड़क में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की पूरी तरह अनदेखी की गई, जिसके कारण निर्माण के महज एक महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से टूटने लगी और दरारें पड़ गईं। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत तेंदूमेर मोहतरा के बीच टोला और जंगल टोला में लाखों रुपए की लागत से सीसी सड़क निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण कार्य में तय मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। कई स्थानों पर सड़क की मोटाई निर्धारित मानक से कम पाई गई, जगह-जगह बोल्डर बाहर दिखाई देने लगे, और सड़क की सतह से रेत व सीमेंट निकलने लगी। इससे साफ है कि निर्माण कार्य बेहद घटिया स्तर का किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच, सचिव और ठेकेदार ने मिलकर निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार किया। मजदूरों की जगह मशीनों का उपयोग कर जल्दबाजी में सड़क तैयार कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में न तो उचित बेस डाला गया और न ही तकनीकी मानकों का पालन किया गया। मामला उजागर होने के बाद जनपद पंचायत डिंडौरी के एसडीओ बृजेंद्र सारीवान द्वारा जांच की गई। लेकिन जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। जानकारी के अनुसार एसडीओ द्वारा जिला पंचायत को सौंपे गए प्रतिवेदन में सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का उल्लेख नहीं किया गया। बल्कि रिपोर्ट में यह बताया गया कि सड़क निर्माण में कोई खामियां नहीं पाई गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ द्वारा जिला पंचायत स्तर से भी जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इस जांच दल में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज जैन, कार्यपालन यंत्री आरईएस विभाग ललित वैद्य, मनरेगा परियोजना अधिकारी प्रदीप कुमार शुक्ला और लेखापाल सुधीर कुमार चौरसिया को शामिल किया गया। समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि तीन दिवस के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। लेकिन हफ्तों गुजर जाने के बावजूद अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर तीन दिन की जांच हफ्तों तक क्यों लटकी हुई है? क्या दोषियों को बचाने की तैयारी चल रही है या फिर यह भी केवल एक औपचारिक जांच बनकर रह जाएगी? ग्राम पंचायत तेंदूमेर मोहतरा के बीच टोला में बस्ती विकास योजना के तहत लगभग 5 लाख रुपए की लागत से देवकरण के घर से तालका के घर तक सीसी सड़क बनाई गई थी। वहीं कुलपत के घर की ओर 15वें वित्त आयोग की राशि से दूसरी सड़क का निर्माण कराया गया। दोनों ही सड़कें अब शुरुआती दौर में ही क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। ग्राम पंचायत सचिव कमल सिंह पट्टा ने स्वयं स्वीकार किया कि दोनों सड़कों का निर्माण बिना बेस के कराया गया है। उन्होंने बताया कि केवल प्लास्टिक बिछाकर उसके ऊपर सीधे ढलाई कर दी गई। इस कारण सड़क की मजबूती शुरू से ही कमजोर रही। कई जगहों पर अब बोल्डर साफ दिखाई दे रहे हैं, जो निर्माण की पोल खोल रहे हैं। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदार द्वारा मजदूरों की जगह मशीनों का उपयोग किया गया, जिससे गुणवत्ता और भी खराब हो गई। निर्माण कार्य केवल कागजों में मानक अनुसार दिखाया गया, जबकि जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला पंचायत की जांच टीम आखिर कब अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?










