प्रधानमंत्री आवास की किश्तों में देरी पर नगर पालिकाओं की जवाबदेही तय हो – एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव

प्रधानमंत्री आवास की किश्तों में देरी पर नगर पालिकाओं की जवाबदेही तय हो – एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव

मैहर। मध्य प्रदेश की नगर पालिकाओं में सामने आ रहे कथित वित्तीय घोटालों एवं अनियमितताओं के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्तों के भुगतान में देरी का एक और मामला सामने आया है। संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश द्वारा 30 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र ने नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। आम आदमी पार्टी के जिला विधि प्रकोष्ठ अध्यक्ष एवं अधिवक्ता आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि इस मामले से मैहर भी अछूता नहीं है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 के बीएलसी घटक के पात्र हितग्राहियों की दूसरी एवं तीसरी किश्त के भुगतान हेतु शासन ने 5,052.66 लाख रुपये अर्थात लगभग 50.53 करोड़ रुपये की अल्पकालीन ऋण राशि आवंटित की है। इसके बावजूद संचालनालय को तत्काल भुगतान के निर्देश जारी करने पड़े। पत्र में 210 नगरीय निकायों में से 68 द्वारा निरंक जानकारी तथा 142 द्वारा अपेक्षा से कम प्रस्ताव भेजने का उल्लेख है। यह स्थिति भुगतान प्रक्रिया में गंभीर शिथिलता और प्रशासनिक जवाबदेही की जांच की मांग करती है। श्रीवास्तव ने कहा कि पात्रता एवं निर्माण संबंधी शर्तें पूरी होने के बावजूद हितग्राहियों की किश्तें लंबित रखना केवल कार्यालयीन लापरवाही का विषय नहीं, बल्कि योजना के उद्देश्य और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों, विशेषकर मैहर नगर पालिका में हितग्राहीवार स्वीकृति, आवंटन और वास्तविक बैंक भुगतान का अभिलेखीय मिलान कराया जाए। भुगतान में देरी के कारण सार्वजनिक किए जाएं तथा जानबूझकर भुगतान रोकने अथवा कर्तव्य में लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गरीबों के आवास के लिए आवंटित धनराशि किसी अधिकारी की मनमर्जी या कार्यालयीन उदासीनता की बंधक नहीं हो सकती। अब आवश्यक है कि भुगतान सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह भी तय हो कि हितग्राहियों को उनके अधिकारों से वंचित रखने के लिए जवाबदेह कौन है।

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