क्या डिंडोरी में पत्रकारों की जगह ले रहे हैं रील बनाने वाले यूट्यूबर?

डिंडोरी,,डिंडोरी जिले में इन दिनों जनसंपर्क व्यवस्था को लेकर एक नई बहस खड़ी हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब जिले में जनसंपर्क अधिकारी को पत्रकारों की आवश्यकता नहीं रह गई है और शासकीय कार्यक्रमों की खबरें अब सोशल मीडिया क्रिएटरों और रील बनाने वाले यूट्यूबरों के माध्यम से ही प्रकाशित कराई जाएंगी। मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो से यह चर्चा तेज हो गई है कि जिले में कलेक्टर के दौरे और विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों की खबरों के लिए यूट्यूबरों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। बताया जा रहा है कि जनसंपर्क अधिकारी स्वयं सोशल मीडिया क्रिएटरों को फोन कर कार्यक्रमों की जानकारी देते हैं और उन्हें अपनी शासकीय कार में बैठाकर कलेक्टर के दौरे में साथ ले जाते हैं, ताकि वे अपने यूट्यूब चैनलों पर वीडियो बनाकर प्रकाशित कर सकें। इस पूरे मामले ने जिले के पत्रकारों के बीच असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। वर्षों से क्षेत्र की समस्याओं, जनहित के मुद्दों और विकास कार्यों को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकारों का कहना है कि जनसंपर्क विभाग का दायित्व सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को समान रूप से जानकारी उपलब्ध कराना होता है। यदि किसी एक वर्ग को प्राथमिकता दी जाती है तो यह पत्रकारिता के साथ न्याय नहीं माना जा सकता। इस स्थिति की झलक 26 जनवरी 2026 को पुलिस ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों और अधिकारियों के बीच बड़ी संख्या में रील बनाने वाले यूट्यूबरों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। शासकीय कार्यक्रम के बीच सोशल मीडिया क्रिएटरों की धमा-चौकड़ी ने पारंपरिक पत्रकारिता की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए। बेशक आज का समय डिजिटल और सोशल मीडिया का है, लेकिन जिम्मेदार और तथ्यात्मक पत्रकारिता की अपनी अलग पहचान और आवश्यकता है। यदि शासकीय खबरों का जिम्मा केवल रील बनाने वाले क्रिएटरों को सौंप दिया जाएगा, तो इससे खबरों की गंभीरता और विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।जरूरत इस बात की है कि जनसंपर्क विभाग संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी पत्रकारों और मीडिया माध्यमों को समान अवसर दे, ताकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मजबूत बना रहे और जनता तक सही जानकारी पहुंचती रहे।











