जिले में चल रहा फर्जी बिलों का खेल, बिना विज्ञापन के हो रहा भुगतान

अभिषेक तिवारी की खास रिपोर्ट
जिले में इन दिनों फर्जी बिलों का खेल तेजी से फैलता हुआ नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि बिना किसी समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित हुए और बिना किसी अधिकृत चैनल में प्रसारण के ही विज्ञापन के नाम पर लाखों रुपये के बिल लगाए जा रहे हैं और उनका भुगतान भी किया जा रहा है। यह पूरा मामला अब धीरे-धीरे चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां न तो किसी समाचार पत्र में विज्ञापन छपा, न ही किसी चैनल पर उसका प्रसारण हुआ, लेकिन कागजों में विज्ञापन दिखाकर भुगतान कर दिया गया। इस व्यवस्था ने पूरी पत्रकारिता की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग पत्रकारिता को जनहित की आवाज बनाने के बजाय सिर्फ कमाई का जरिया बना चुके हैं। ऐसे लोग फर्जी बिल बनाकर विभागों में प्रस्तुत करते हैं और भुगतान कराने के लिए दबाव तक बनाते हैं। इससे जिले के अधिकारी, ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि और कई शासकीय कर्मचारी भी परेशान नजर आ रहे हैं।
ग्राम पंचायत स्तर से लेकर कई विभागों में इस तरह के बिलों की चर्चा हो रही है। कई जगहों पर अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर बिना किसी प्रमाण के लगाए गए बिलों का भुगतान कैसे किया जाए। वहीं कुछ मामलों में बिना जांच के भुगतान होने की बात भी सामने आ रही है। जिले में पत्रकारिता के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े ने ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। जरूरत है कि प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करे और यह पता लगाए कि आखिर बिना विज्ञापन के भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है। अगर समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह फर्जी बिलों का खेल आगे और भी बड़ा रूप ले सकता है।
वेबसाइट और युटुब के भरोसे चल रहा पत्रकारिता
आज के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप बदलता जा रहा है। अब कई लोग सिर्फ वेबसाइट और यूट्यूब के भरोसे पत्रकारिता चला रहे हैं। बिना ज़मीनी पड़ताल और जिम्मेदारी के खबरें परोसी जा रही हैं, जिससे असली पत्रकारिता की साख पर सवाल उठ रहे हैं। समाज को सच और जिम्मेदार पत्रकारिता की जरूरत है।











