डिंडौरी में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना
करोड़ों खर्च, फिर भी सूखे पड़े सरोवर — ग्रामीणों ने लगाए भारी भ्रष्टाचार के आरोप

डिंडौरी। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जल संरक्षण, सिंचाई और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह योजना जिले में अफसरों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। मामला समनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पडरिया-03 का है, जहां वर्ष 2022 में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा लगभग 97.45 लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद इस अम्रत सरोवर के गुणवत्ता की पोल खुल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरोवर निर्माण में तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार किया गया। जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए इस सरोवर में शुरुआत से ही पानी का तेजी से रिसाव होने लगा, जिसके कारण गर्मी आने से पहले ही पूरा सरोवर सूख गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सरोवर में एक बूंद पानी तक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया गया होता, तो गांव के किसानों, पशुपालकों और मछली पालन से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता था।
निर्माण में भारी अनियमितताओं के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के सब इंजीनियर और एसडीओ की मिलीभगत से ठेकेदार ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती। आरोप है कि सरोवर की खुदाई, पिचिंग, मिट्टी दबाव और जल रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। निर्माण में घटिया सामग्री और गलत तकनीक का उपयोग किया गया, जिसके कारण सरोवर पानी रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि जब गांव में अमृत सरोवर निर्माण शुरू हुआ था तब लोगों में काफी उत्साह था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें खेती की सिंचाई, पशुओं के लिए पानी और मछली पालन जैसी गतिविधियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा। लेकिन निर्माण में हुई कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
जिले को मिली थी 101 अमृत सरोवरों की सौगात
देश की आजादी के 75वें वर्ष के अवसर पर मनाए गए अमृत महोत्सव के दौरान केंद्र सरकार ने आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले को 101 अमृत सरोवरों की सौगात दी थी। योजना का उद्देश्य गांवों में जल संरक्षण को बढ़ावा देना, भूजल स्तर सुधारना, सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना और ग्रामीणों को मछली पालन व सिंघाड़ा उत्पादन जैसे रोजगार के अवसर देना था,लेकिन जिले में योजना के क्रियान्वयन पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर अमृत सरोवर सिर्फ कागजों और फोटो तक सीमित होकर रह गए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश सरोवरों में पानी नहीं रुक पा रहा है। कई जगह निर्माण के तुरंत बाद ही पानी रिसने लगा, जबकि कुछ सरोवर गर्मी शुरू होने से पहले ही पूरी तरह सूख गए।
जिम्मेदार अधिकारी बने अनजान
ग्रामीणों का कहना है कि सरोवरों की बदहाल स्थिति की जानकारी विभागीय अधिकारियों को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप है कि शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं।
बची राशि निकालने की फिराक में जिम्मेदार
सूत्रों के अनुसार अम्रत सरोवर तालाब का गुणवत्ताहीन निर्माण होने के बावजूद जिम्मेदार अब भी शेष भुगतान निकालने की फिराक में लगा हुए है।










