करंजिया में स्थाई सीईओ नहीं होने से अधिकारी – कर्मचारियों पर मनमानी तरीके से काम करने का आरोप
– जनपद पंचायत अध्यक्ष राजू सिंह ने की स्थाई सीईओ की मांग
– डिप्टी कलेक्टर को एसडीएम और सीईओ का दिया गया प्रभार

गणेश मरावी,डिंडौरी। जिले के जनपद पंचायत करंजिया में एक साल से स्थाई सीईओ नहीं है। यहां पर स्थाई सीईओ नहीं होने के कारण विभागीय योजनाओं के क्रियान्वन में भारी लापरवाही बरती जा रही है। जनपद पंचायत अध्यक्ष राजू सिंह ने प्रशासन से स्थाई सीईओ की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि करंजिया जनपद पंचायत में लगभग एक साल से डिप्टी कलेक्टर को एसडीएम एवं सीईओ दोनों का प्रभार दिया गया है। जो पूरा समय जनपद पंचायत को नही दे पा रहे है। जिसके चलते अधिकारी – कर्मचारियों के द्वारा अपने मनमानी तरीके से काम कर रहे है। वहीं अन्य कार्यों में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है।
निर्माण कार्यों की नहीं हो रही माॅनिटरिंग
जनपद अध्यक्ष राजू सिंह ने बताया कि प्रशासनिक कार्यों के लिए स्थाई सीईओ की अति आवश्यकता है,जिससे सभी प्रकार के योजनाओं तथा विकास कार्यों को सुचारू रूप से संचालन एवं विकास योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग हो सके। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का कहना है कि जनपद पंचायत में नियमित एवं स्थाई सीईओ की नियुक्ति होने से प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, स्वच्छता, सड़क एवं पेयजल जैसी योजनाओं के कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही पंचायतों के निरीक्षण और विकास कार्यों की निगरानी भी बेहतर ढंग से हो सकेगी। ग्रामीणों तथा जनप्रतिधियों ने जिला प्रशासन से जल्द नियमित सीईओ की पदस्थापना करने की मांग की है। ताकि क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित न हों और आमजन को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
कलेक्टर के समक्ष रखी गई थी स्थाई सीईओ का मुददा
जनपद अध्यक्ष राजू सिंह ने बताया कि जनपद पंचायत करंजिया में स्थाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी नही होने से जनपद का बहुत कार्य प्रभावित हो रहा है। जनपद पंचायत करंजिया में लगभग एक साल से स्थाई सीईओ नही होने के कारण डिप्टी कलेक्टर अक्षय डिगरसे तथा इनके अनुपस्थिति में संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी को एसडीएम बजाग और करंजिया मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार दिया जाता है। जबकि प्रशासनिक पवार किसी अन्य सीईओ को दिया गया है,जो आज तक हमारे सामने नही आए है। अध्यक्ष ने बताया कि सभी जनपद सदस्यों के साथ स्थाई सीईओ की मांग कलेक्टर से किये थे,उसके बाद भी कलेक्टर के द्वारा स्थाई सीईओ की पदस्थापना नहीं की गई है। ऐसे में लोंगो को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,साथ ही निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार बढ़ रही है।










