
डिंडोरी। जिले में सरकारी खाद्यान्न के रखरखाव को लेकर एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज करीब पांच किलोमीटर दूर निगवानी स्थित ओपन कैप स्टोरेज सेंटर में बारिश के कारण सैकड़ों क्विंटल धान खराब होने की तस्वीरें सामने आई हैं। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया यह धान खुले में भंडारित किया गया था, लेकिन बारिश से बचाव और उचित रखरखाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में धान भीगकर सड़ने की स्थिति में पहुंच गया। अब इस खराब धान को लेकर एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इसे नष्ट करने या नियमानुसार अलग करने के बजाय मिलिंग के लिए क्यों भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि ओपन कैप में बारिश से प्रभावित धान को नई बोरियों में भरकर राइस मिलों तक भेजा जा रहा है। आरोप है कि मिलिंग के बाद इसी धान से तैयार होने वाले चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीब उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित विभाग की जांच और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन यदि खराब अथवा मानक से बाहर धान की मिलिंग कराकर उससे तैयार चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल किया जाता है, तो यह खाद्य सुरक्षा और गरीबों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
खुले में हजारों क्विंटल धान, बारिश बनी मुसीबत
निगवानी स्थित ओपन कैप स्टोरेज सेंटर में बड़ी मात्रा में धान का भंडारण किया गया है। बारिश के मौसम में खुले में रखे धान को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल, प्लेटफॉर्म, जल निकासी और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में कई स्थानों पर धान बारिश से प्रभावित नजर आ रहा है। कुछ बोरियां भीगी हुई हैं, जबकि बड़ी मात्रा में धान के खराब होने की बात कही जा रही है। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया अनाज सरकारी संपत्ति होता है। ऐसे में उसके भंडारण से लेकर मिलिंग और वितरण तक प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है। सवाल उठ रहा है कि जब बारिश का मौसम पहले से था, तो खुले में रखे धान को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
नई बोरियों में भरकर मिलिंग के लिए भेजने पर सवाल
सबसे गंभीर आरोप खराब धान को नई बोरियों में भरकर राइस मिलों तक भेजे जाने को लेकर है। यदि धान बारिश में भीगकर सड़ चुका है या उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो गई है, तो नियमानुसार उसकी गुणवत्ता की जांच और वर्गीकरण होना चाहिए। ऐसे में बिना स्पष्ट गुणवत्ता परीक्षण के उसे सामान्य धान की तरह मिलिंग के लिए भेजे जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब धान को नई बोरियों में भर देने से उसकी वास्तविक स्थिति छिप सकती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए प्रशासन और संबंधित खाद्य एजेंसियों को तत्काल मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी मात्रा में धान खराब हुआ है, उसकी गुणवत्ता क्या है और उसे किस प्रक्रिया के तहत मिलिंग के लिए भेजा जा रहा है।
गरीबों की थाली तक पहुंचने वाले चावल की गुणवत्ता का सवाल
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जिले के हजारों गरीब परिवारों को सरकारी चावल उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में मिलिंग के बाद तैयार होने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। यदि बारिश से प्रभावित धान की गुणवत्ता खराब हो चुकी है तो उससे तैयार चावल को वितरण प्रणाली में शामिल करने से पहले खाद्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप जांच जरूरी है। यह मामला केवल सरकारी धान के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक धन की बर्बादी और खाद्य सुरक्षा दोनों जुड़े हुए हैं। किसानों से खरीदे गए धान पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है। यदि उचित भंडारण के अभाव में वही धान सड़कर बर्बाद होता है तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने और अंततः आम जनता को होता है।
वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
धान के भंडारण और रखरखाव की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निगवानी ओपन कैप में रखे धान की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। बारिश शुरू होने के बाद धान को सुरक्षित रखने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी और यदि धान खराब हो रहा था तो उसे समय रहते सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया। प्रशासन को यह भी जांचना चाहिए कि ओपन कैप में कुल कितनी मात्रा में धान रखा गया था, उसमें से कितनी मात्रा बारिश से प्रभावित हुई और कितने धान को मिलिंग के लिए भेजा गया। साथ ही खराब धान की गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।
पहले भी सामने आ चुके हैं खाद्यान्न बर्बादी के मामले
डिंडोरी जिले में सरकारी खाद्यान्न के खराब होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अलग-अलग स्थानों पर राशन और खाद्यान्न के रखरखाव में लापरवाही के आरोप सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद यदि दोबारा बड़ी मात्रा में सरकारी धान बारिश में खराब हो रहा है तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
डिंडोरी जिले में सरकारी खाद्यान्न के खराब होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अलग-अलग स्थानों पर राशन और खाद्यान्न के रखरखाव में लापरवाही के आरोप सामने आते रहे हैं। इसके बावजूद यदि दोबारा बड़ी मात्रा में सरकारी धान बारिश में खराब हो रहा है तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।











