
मतांतरित लोगों को आरक्षण से बाहर करने की मांग: समाज के भीतर से उठी आवाज, जांच की मांग लेकर कलेक्टर पहुंचे शिकायतकर्ता
डिंडौरी। आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में धर्म परिवर्तन (मतांतरण) को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आरक्षण के मुद्दे पर आवाज समाज के भीतर से उठी है। मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान समनापुर थाना क्षेत्र के ग्राम भानपुर निवासी पवन कुमार अहिरवार ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक विस्तृत शिकायत सौंपते हुए मांग की कि ऐसे लोगों की जांच कराई जाए जिन्होंने कथित रूप से ईसाई धर्म अपना लिया है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में स्वयं को हिंदू दर्शाकर अनुसूचित जाति के आरक्षण सहित अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक समिति गठित की जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों का अनुसूचित जाति का लाभ समाप्त करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शिकायत में एक दर्जन से अधिक लोगों के नामों का उल्लेख किए जाने का भी दावा किया गया है।
भानपुर सहित आसपास के गांवों का किया उल्लेख
शिकायत में कहा गया है कि ग्राम भानपुर के साथ-साथ आसपास के कई गांव भी इस समस्या से प्रभावित हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई परिवारों ने कथित रूप से लालच अथवा अन्य कारणों से ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है, लेकिन शासकीय रिकॉर्ड में अब भी स्वयं को हिंदू दर्शा रहे हैं। इसके कारण वे अनुसूचित जाति का आरक्षण, छात्रवृत्ति, राशन सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति वास्तविक रूप से धर्म परिवर्तन कर चुका है तो उसे संविधान के प्रावधानों के अनुरूप ही शासकीय लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि पात्र और अपात्र हितग्राहियों के बीच स्पष्ट अंतर हो सके।
पहले भी दर्ज कराया था मतांतरण का मामला
पवन कुमार अहिरवार ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले समनापुर थाने में भी एक पास्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार एक महिला को कथित रूप से प्रलोभन और भय दिखाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज किया था और उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। यह मामला पहले से जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है।
संवैधानिक प्रावधानों का दिया हवाला
शिकायत में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 तथा अनुसूचित जातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों तक सीमित है। उनका दावा है कि यदि कोई व्यक्ति अन्य धर्म स्वीकार करता है तो अनुसूचित जाति के आरक्षण की पात्रता समाप्त हो जाती है। इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
सरकारी दस्तावेजों में धर्म संबंधी जानकारी की जांच की मांग
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ परिवार वास्तविक जीवन में ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं, जबकि स्कूल रिकॉर्ड, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों में स्वयं को हिंदू दर्शा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इन परिवारों के बच्चों के दस्तावेजों में भी हिंदू धर्म अंकित है, जबकि वे कथित रूप से ईसाई धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। उन्होंने सभी दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है।
पहले भी उठ चुका है मिशनरियों का मुद्दा
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से डिंडौरी जिले में मतांतरण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे पहले आदिवासी समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने भी जनसुनवाई में मिशनरी गतिविधियों की जांच कराने तथा कथित अवैध धर्म परिवर्तन पर कार्रवाई की मांग की थी। बजाग, करंजिया, समनापुर, मेहंदवानी तथा अमरपुर क्षेत्र के कुछ गांवों का नाम भी शिकायतों में सामने आता रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल शिकायत कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत की गई है। अब यह प्रशासन पर निर्भर करेगा कि शिकायत की प्रारंभिक जांच कराई जाती है या किसी समिति का गठन किया जाता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और संबंधित मामलों में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।










