
जंगलों में डेढ़ लाख से अधिक सरई के पेड़ प्रभावित, कीट नियंत्रण अभियान तेज,,,,,,,,
तीस हजार से अधिक हैक्टेयर वन क्षेत्र में साल बोरर कीट का फैल रहा प्रकोप
डिंडोरी,,जिले के सामान्य वन मंडल के जंगलों में लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर कीट का गंभीर प्रकोप देखने को मिला है। वर्ष 1997-98 के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सरई (साल) के पेड़ इस कीट से प्रभावित हुए हैं। वन विभाग के अनुसार पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के करीब 30 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैले 1 लाख 46 हजार 784 सरई के पेड़ों पर साल बोरर कीट का हमला हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद इन प्रभावित पेड़ों की कटाई की जाएगी, ताकि संक्रमण को अन्य स्वस्थ पेड़ों तक फैलने से रोका जा सके। वन विभाग ने फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में कीट नियंत्रण अभियान शुरू कर दिया है। इसमें स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विभाग का मानना है कि समय रहते कीटों की संख्या नियंत्रित नहीं की गई तो बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान हो सकता है।
20 जून से चल रहा कीट पकड़ो अभियान
एसडीओ एसके जाटव सामान्य वन मंडल हिंडौरी ने बताया कि 20 जून से कीट पकड़ो अभियान संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों की मदद से साल बोरर कीटों को पकड़कर नष्ट किया जा रहा है। अब तक करीब -10 लाख कीटों के सिर वन विभाग को जमा कराए जा चुके हैं। विभाग ने प्रत्येक कीट के सिर पर 2 रुपये का प्रोत्साहन निर्धारित किया जिससे ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान लगभग 15 हजार संक्रमित पेड़ों का उपयोग कीटों को आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। जुलाई के अंत में एकत्र कीटों को दो डीएफओ अधिकारियों की मौजूदगी में नष्ट किया जाएगा
सरई के पेडों को खतरनाक है कीट
वन विशेषज्ञों का मानना है कि साल बोरर कीट सरई के जंगलों के लिए सबसे खतरनाक कीटों में से एक है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह बड़ी संख्या में स्वस्थ पेड़ों को भी संक्रमित कर सकता है। यही कारण है कि वन विभाग संक्रमित पेड़ों की कटाई, कीट नियंत्रण और ग्रामीणों की भागीदानी के माध्यम से इस प्रकोप पर जल्द से जल्द काबू पाने का प्रयास कर रहा है। वन विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि यदि जंगलों में बड़ी संख्या में सूखते हुए सरई के पेड़ दिखाई दें इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दे, ताकि समय रहते तो आवश्यक कार्रवाई की जा सके
ऐसे पकड़े जाते हैं साल बोरर कीट
बन अधिकारियों के अनुसार साल बोरर कीटों को पकड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है। सबसे पहले संक्रमित सरई के पेड़ को काटकर उसकी छाल पर चोट की जाती है। इससे निकलने वाली गंध और रस की और करीब तीन किलोमीटर दूर तक मौजूद कीट आकर्षित होकर पहुंच जाते हैं। रातभर पेड़ों पर एकत्र होने के बाद सुबह सूर्योदय से पहले ग्रामीण इन कीटों को पकड़ लेते हैं। सूरज निकलने के बाद कीट दोबारा उड़ने लगते हैं, यह कार्य सुबह जल्दी किया जाता है। ग्रामीण कीटों के सिर अलग कर उनकी माला बनाकर वन विभाग के कर्मचारियों के पास जमा करते हैं, जिसके बाद उन्हें निर्धारित भुगतान किया जाता है।
अनुमति के बाद होगी पेड़ों की कटाई
वन विभाग की उत्पादन शाखा की डीएफओ भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल द्वारा प्रभावित 1 लाख 46 हजार 784 पेड़ों की मार्किंग पूरी कर ली गई है। अब अंतिम अनुमति के लिए प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही प्रभावित पेड़ों की कटाई होगी, जिसमें लगभग तीन महीने का समय लगेगा। कटाई कार्य की निगरानी के लिए चार डीएफओ की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभाग को इस प्रक्रिया से लगभग 46,390 घनमीटर इमारती लकडी तथा 43,390 घनमीटर जलाऊ लकड़ी प्राप्त होने की उम्मीद है। प्राप्त शुरू जिन्होंने 500 मिलकडी को गाड़ा सरई एवं करंजिया काष्ठगार में रखा जाएगा।










