
जिला पंचायत के जिम्मेदार कर रहे सूचना के अधिकार की अनदेखी: दो माह बाद भी नहीं मिला जांच प्रतिवेदन
डिंडौरी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराना प्रत्येक शासकीय विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन जिला पंचायत डिंडौरी पर आरटीआई के प्रावधानों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। मामला जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत तेंदूमेर-मोहतरा के सचिव के कथित स्टिंग ऑपरेशन और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों के बाद जिला पंचायत सीईओ द्वारा दो सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच पूरी होने के बाद टीम ने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसी जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित छायाप्रति प्राप्त करने के लिए 23 अप्रैल 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था।आवेदन में स्पष्ट रूप से जांच दल द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन की प्रमाणित प्रति मांगी गई थी, लेकिन लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। आरटीआई अधिनियम के अनुसार सामान्य मामलों में 30 दिनों के भीतर सूचना प्रदान करना अनिवार्य है। सूचना समय पर उपलब्ध न होने से विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आवेदक का कहना है कि यदि शीघ्र जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो मामले की शिकायत प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं राज्य सूचना आयोग से की जाएगी। वहीं, जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।










