
गणेशपुर पंचायत भवन निर्माण में गड़बड़ी पर उपयंत्री को नोटिस और सरपंच-सचिव पर कार्रवाई के निर्देश
डिंडौरी। जनपद पंचायत डिंडौरी की ग्राम पंचायत गणेशपुर में निर्माणाधीन पंचायत भवन (अटल भवन) की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सामने आई अनियमितताओं के बाद तकनीकी अमला सहित सरपंच सचिव के विरूद्व कार्रवाई शुरू हो गई है। विगत दिवस कलेक्टर के निरीक्षण में भवन निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलने, जगह-जगह हनीकॉम्बिंग यानी कंक्रीट में खाली जगहें पाए जाने, सीढ़ियों की ऊंचाई और चैड़ाई अनुपयुक्त होने तथा निर्माण कार्य अधूरा मिलने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मामले में सरपंच-सचिव के विरुद्ध धारा 89 के तहत प्रकरण दर्ज कर सुनवाई निर्धारित की गई है। वहीं तकनीकी निगरानी से जुड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सहायक यंत्री और उपयंत्री को फिलहाल नोटिस देकर जवाब मांगने तक कार्रवाई सीमित दिखाई दे रही है।
31 लाख का आहरण, मूल्यांकन 20 लाख का
जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर ने गणेशपुर पंचायत भवन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में निर्माण कार्य अधूरा और गुणवत्ता में कमियां पाई गईं। इसके बाद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री ने 24 अक्टूबर को जारी प्रतिवेदन में बताया कि ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार पंचायत द्वारा 31 लाख 64 हजार 624 रुपये की राशि आहरित की जा चुकी है। दस्तावेज में 27 लाख 89 हजार 724 रुपये आहरित होने और माप पुस्तिका में 20 लाख 1 हजार 690 रुपये का मूल्यांकन दर्ज होने का भी उल्लेख है। इन आंकड़ों के बीच अंतर को लेकर राशि के उपयोग, निर्माण की वास्तविक प्रगति और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खडे हो रहे हैं।
उपयंत्री की जिम्मेदारी पर कार्रवाई कब?
जारी नोटिस में उपयंत्री धर्मेंद्र यादव को निर्माण कार्य तकनीकी मार्गदर्शन और देखरेख नहीं कराने तथा कार्य अधूरा रहने के संबंध में जवाबदेही तय करने के लिए तीन दिन में लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सहायक यंत्री बीरसिंह तिलगाम की भूमिका और तकनीकी निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जब निर्माण की गुणवत्ता, माप पुस्तिका में मूल्यांकन और भुगतान की प्रक्रिया में तकनीकी अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, तो उनकी जिम्मेदारी की जांच किस स्तर तक होगी? क्या कार्रवाई केवल सरपंच-सचिव तक सीमित रहेगी या तकनीकी निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?











