
37.50 लाख के पंचायत भवन में 33 लाख का भुगतान, फिर भी काम अधूरा!,,,,,
तेंदूमेर-मोहतरा में सचिव ने उपयंत्री पर लगाया था 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप, अब गणेशपुर के सरपंच ने लगाया जबरन बिल लगवाने का आरोप,,,,,
बड़ा सवाल: क्या नेताजी के संरक्षण में बच जाएंगे उपयंत्री , या होगी कार्रवाई ?
डिंडौरी/गणेशपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान और तकनीकी मूल्यांकन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। तेंदूमेर-मोहतरा ग्राम पंचायत में सीसी रोड निर्माण के मामले में सचिव द्वारा उपयंत्री पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाए जाने के बाद अब गणेशपुर ग्राम पंचायत में पंचायत भवन निर्माण को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां सरपंच ने उपयंत्री धर्मेंद्र यादव पर जबरन बिल लगवाने का आरोप लगाया है। करीब 37 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बन रहे पंचायत भवन में ठेकेदार को लगभग 33 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है, जबकि सरपंच का दावा है कि भुगतान के अनुपात में निर्माण कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर निर्माण कार्यों की निगरानी और भुगतान की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
33 लाख का भुगतान, फिर भी निर्माण अधूरा
गणेशपुर ग्राम पंचायत के सरपंच के अनुसार, पंचायत भवन निर्माण का कार्य विक्रमपुर निवासी ठेकेदार सुशील राय द्वारा कराया जा रहा है। भवन की कुल स्वीकृत लागत करीब 37 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है, जिसमें से लगभग 33 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद निर्माण कार्य भुगतान के अनुपात में नहीं हो पाया है। सरपंच का कहना है कि भवन में अभी प्लास्टर का काम चल रहा है और ठेकेदार की लापरवाही के कारण काम निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। सरपंच ने यह भी दावा किया कि कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच में भुगतान के अनुरूप निर्माण कार्य नहीं होने की बात सामने आई थी। यदि ऐसा है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि निर्माण की वास्तविक प्रगति का आकलन किस आधार पर किया गया और भुगतान से पहले कार्य की गुणवत्ता तथा मात्रा का सत्यापन किस प्रकार हुआ।
सरपंच का आरोप—उपयंत्री ने कहा, मूल्यांकन के लिए मैं बैठा हूं, पेमेंट आप करिए
सरपंच ने उपयंत्री धर्मेंद्र यादव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपयंत्री ने उनसे कहा था, “मूल्यांकन के लिए मैं बैठा हूं, पेमेंट आप करिए।” सरपंच का दावा है कि पंचायत द्वारा ठेकेदार को जो भी भुगतान किया गया, वह उपयंत्री के कहने पर ही किया गया। सरपंच के इस बयान के बाद तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि भुगतान के अनुरूप निर्माण कार्य नहीं हुआ है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित बिलों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया। साथ ही, ठेकेदार सुशील राय की जिम्मेदारी और उपयंत्री धर्मेंद्र यादव की तकनीकी भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
तेंदूमेर-मोहतरा के बाद गणेशपुर में भी सवालों के घेरे में उपयंत्री
तेंदूमेर-मोहतरा में सीसी रोड निर्माण को लेकर सचिव द्वारा कथित तौर पर 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाए जाने के बाद गणेशपुर का मामला सामने आने से पंचायतों में तकनीकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दोनों मामलों में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है।
क्या नेताजी के संरक्षण में बच जाएंगे उपयंत्री, या होगी कार्रवाई?
गणेशपुर पंचायत भवन मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि 33 लाख रुपये के भुगतान के बावजूद निर्माण कार्य उस स्तर का नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या जांच केवल सरपंच-सचिव तक सीमित रहेगी, या मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री और संबंधित ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी? क्या कथित राजनीतिक संरक्षण के चलते उपयंत्री धर्मेंद्र यादव पर कार्रवाई नहीं होगी, या प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय करेगा? अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।











