
गणेशपुर पंचायत भवन निर्माण में अनियमितता, सरपंच-सचिव पर कार्रवाई तो उपयंत्री की जवाबदेही कब?
डिंडौरी/ जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत गणेशपुर में पंचायत भवन निर्माण कार्य में सामने आई अनियमितताओं ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अंजू भदौरिया ने पंचायत सचिव भागवत प्रसाद यादव के निलंबन की कार्रवाई करने तथा सरपंच अमर सिंह पट्टा से राशि की वसूली और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के इन निर्देशों के बाद अब निर्माण कार्य का मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि जब सरकारी निर्माण कार्यों में तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी की व्यवस्था है, तो अनियमितता सामने आने पर जवाबदेही केवल सरपंच और सचिव तक ही सीमित क्यों रहे?
31 लाख 64 हजार 624 रुपये के आहरण का उल्लेख, वास्तविक खर्च की जांच जरूरी
ग्राम पंचायत गणेशपुर के पंचायत भवन निर्माण के संबंध में उपलब्ध पोर्टल विवरण के अनुसार 31 लाख 64 हजार 624 रुपये की राशि के आहरण का उल्लेख है, जबकि निर्माण कार्य की कुल लागत करीब 37 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। ऐसे में निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि, वास्तविक व्यय, भुगतान और मौके पर हुए निर्माण की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। जांच में यह सामने आना चाहिए कि अब तक कितना निर्माण हुआ है और उसके अनुपात में कितनी राशि का भुगतान किया गया। साथ ही, निर्माण कार्य में अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री की जवाबदेही कब होगी तय
किसी भी सरकारी भवन के निर्माण में सरपंच और सचिव के साथ तकनीकी अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित मापदंडों का पालन, कार्य की प्रगति और तकनीकी मूल्यांकन की जिम्मेदारी निगरानी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित उपयंत्री ने निर्माण कार्य का निरीक्षण कब-कब किया और मूल्यांकन किस आधार पर किया गया? क्या मौके पर मौजूद निर्माण की स्थिति का विभागीय अभिलेखों से मिलान किया गया था? क्या माप पुस्तिका और निरीक्षण प्रतिवेदनों में दर्ज विवरण वास्तविक निर्माण से मेल खाते हैं? इन बिंदुओं की जांच के बिना पूरे मामले में जिम्मेदारी का निर्धारण अधूरा रह सकता है। हालांकि, उपयंत्री की भूमिका में लापरवाही या अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
निर्माण एजेंसी और भुगतान प्रक्रिया की भी हो जांच
मामले में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि पंचायत भवन निर्माण का कार्य किस एजेंसी या ठेकेदार को सौंपा गया था। निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सामग्री के उपयोग, तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। यदि अभिलेखों में दर्ज कार्य और मौके पर हुए निर्माण में अंतर पाया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए।
कार्रवाई के साथ सभी जिम्मेदारों की जवाबदेही भी जरूरी
गणेशपुर पंचायत भवन निर्माण मामले में सरपंच और सचिव के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश प्रशासन की गंभीरता को दर्शाते हैं। लेकिन अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच का दायरा तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी से जुड़े अधिकारियों तक पहुंचता है या नहीं। सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई है और उसके उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सभी संबंधितों की जिम्मेदारी है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सरपंच-सचिव तक सीमित रहेगी या मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री सहित अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी? जांच में जिस भी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित हो, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।











