
वन क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन को रोकने पर की गई झूठी शिकायत, महिला रेंजर ने किया खुलासा
डिंडोरी । सामान्य वन मंडल अंतर्गत पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र में प्रतिबंधित वन क्षेत्र के अंदर अवैध गौंड खनिज को रोकने की कार्रवाई को लेकर वन समिति सदस्य और वन अमला आमने सामने आ गये हैं। जहां कार्रवाई से तिलमिलाए वन समिति ने महिला रेंजर पर बेजा बसूली के आरोप लगाये हैं,वहीं रेंजर ने आरोपों को खारिज करते हुये अवैध परिवहन पर समझौता नहीं करने की बात कहते हुए इस षिकायत को षणयंत्र करार दिया है। गौरतलब है कि सामान्य वन परिक्षेत्र अंतर्गत पूर्व करंजिया वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले वन ग्राम जगतपुर की वन समिति सदस्यों बुधवार को वन मंडल कार्यालय पहुंचकर षिकायत की थी कि महिला रेंजर कौशांबी झा ने काष्ठ लाभांश की राशि 3 लाख 44 हजार रुपये दबाव देकर हडप ली है। षिकायत पर डीएफओ अषोक सोलंकी ने जांच करवाने का आष्वासन दिया था। पूरे मामले का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जगतपुर वनग्राम में पर्यटन विभाग द्वारा होम स्टे योजना के तहत दस हितग्राहियों का चयन किया गया है। यहां इन होम स्टे का निर्माण कार्य गांव के ही जगदीश धुर्वे करवा रहे हैं। बताया गया है कि जगदीष की माता मदिया बाई के नाम से भी होम स्टे स्वीकृत है। जिसके निर्माण हेतु प्रतिबंधित वन परिक्षेत्र से पत्थर और अन्य गौण खनिज का अवैध परिवहन जारी था। जिसकी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची रेंजर कौंषांबी झा ने रिजर्व वन क्षेत्र का हवाला देकर अवैध परिवहन पर रोक लगाई थी और दो डिप्टी रेंजर के साथ वन रक्षकों की टीम गठित कर जांच करवाई थी। जिसकी रिपोर्ट सोमवार को वन मंडल कार्यालय भेजी गई थी। बतलाया गया है कि वन विभाग की उक्त कार्यवाही से बौखलाकर जगदीश सिंह धुर्वे ने वन समिति के सदस्यों और ग्रामीणों के साथ षड्यंत्र रच कर षिकायत की थी। पूरे मामले में विषेष पहलू यह है कि पर्यटन विभाग ने वन विभाग को निर्माण कार्य की सूचना देना उचित नहीं समझा जिसके चलते ग्रामीण और वन अमले के बीच तनातनी चालू हो गई है। विदित होवे कि प्रतिबंधित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का खनन और परिवहन की पूर्णतः मनाही होती है। इसके साथ ही किसी भी निर्माण कार्य की सूचना वन विभाग को प्रेषित करना अनिवार्य प्रावधान है। जिसका पालन न करने से प्रतिकूल परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं।










