लाखों रुपए की पानी टंकी के निर्माण में आई दरारें, 50 फीट ऊंचाई पर मजदूरों के पास नहीं सुरक्षा के इंतजाम
शहपुरा के बढ़झर में जल निगम की योजना से बन रही टंकी, निर्माण स्थल पर सूचना पटल नहीं होने की ग्रामीणों ने उठाई बात; कलेक्टर ने जांच कराने की कही बात

डिंडौरी। जिले के शहपुरा क्षेत्र के ग्राम बढ़झर में जल निगम विभाग की योजना के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माणाधीन टंकी के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं और इन स्थानों पर सीमेंट के मसाले से छपाई कर उन्हें ठीक किया जा रहा है। हालांकि दरारें निर्माण की तकनीकी कमी के कारण आई हैं या किसी अन्य वजह से, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निर्माण पूरा होने से पहले आई दरारें
ग्रामीणों के मुताबिक लाखों रुपये की लागत से तैयार की जा रही पानी की टंकी का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है। इसी बीच टंकी के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। मौके की तस्वीरों में भी कुछ स्थानों पर निर्माण सतह को सीमेंट के मसाले से ठीक किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने इसी प्रक्रिया को लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण के दौरान ही दरारें सामने आ रही हैं, तो इसकी वजह की तकनीकी जांच होना जरूरी है। सवाल यह भी है कि दरार आने के बाद उसकी मरम्मत किस तकनीकी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और क्या इसके संबंध में संबंधित तकनीकी अमले द्वारा निरीक्षण किया गया है। यदि दरार सामान्य निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा है तो विभाग को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, वहीं यदि निर्माण में तकनीकी कमी सामने आती है तो जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
बिना सुरक्षा के करीब 50 फीट ऊंचाई पर मजदूर कर रहे काम
निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया गया कि मजदूर करीब 50 फीट की ऊंचाई पर काम करते नजर आए। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, सेफ्टी बेल्ट और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में हादसे की स्थिति में गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि ऊंचाई पर निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं या नहीं। सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और उनका उपयोग कराने की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी जांच का विषय है। इस संबंध में ठेकेदार और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
निर्माण स्थल से सूचना पटल गायब
ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर सूचना पटल नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौके पर ऐसा बोर्ड दिखाई नहीं दे रहा, जिससे ग्रामीणों को योजना से संबंधित जानकारी मिल सके। निर्माण कार्य की कुल स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कार्य प्रारंभ होने की तिथि और निर्धारित पूर्णता अवधि जैसी जानकारी सार्वजनिक होने से काम की पारदर्शिता बनी रहती है। ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी वाला सूचना पटल लगाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को पता चल सके कि किस योजना के तहत कितनी राशि से निर्माण कराया जा रहा है और इसकी निगरानी किस विभाग अथवा तकनीकी अमले द्वारा की जा रही है।
तकनीकी निगरानी को लेकर भी उठे सवाल
निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण स्थल पर संबंधित तकनीकी अमले की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं देती। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियरों द्वारा कितनी बार स्थल का निरीक्षण किया गया और निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई। विशेष रूप से टंकी जैसे महत्वपूर्ण निर्माण में सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया, संरचनात्मक मजबूती और निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन महत्वपूर्ण होता है। इसलिए निर्माण में कथित दरारों को लेकर तकनीकी परीक्षण कराया जाना जरूरी माना जा रहा है।










