निर्माण कार्य में अनियमितता पर उपयंत्री पर गिरी गाज, निलंबित,,,,,,,
शिवनार नाले की क्षतिग्रस्त पुलिया मामले में कार्रवाई, स्थल चयन से मूल्यांकन और सत्यापन तक बरती गई लापरवाही पर हुई कार्रवाई

डिंडौरी। जनपद पंचायत करंजिया अंतर्गत ग्राम पंचायत सैनगूढ़ा के ग्राम सरैहा में शिवनार नाले पर निर्मित पुलिया के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण कार्य में अनियमितताओं से जुड़े मामले में आखिरकार कार्रवाई हुई है। ‘सच का सामना’ द्वारा निर्माण कार्य की स्थिति और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से जुड़े मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई। जांच में निर्माण कार्य से संबंधित तकनीकी प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आने के बाद जिला पंचायत डिंडौरी ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला ग्राम सरैहा में शिवनार नाले पर निर्मित पुलिया से जुड़ा है। पुलिया निर्माण के लिए कुल 13.59 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। स्वीकृत राशि के विरुद्ध मजदूरी मद में 1.86 लाख रुपए खर्च किए गए हैं, जबकि सामग्री मद की 9.39 लाख रुपए की राशि का देयक मूल्यांकन के बाद भुगतान के लिए नरेगा सॉफ्ट के एमआईएस में दर्ज किया गया था। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता, स्थल चयन तथा कार्य के मूल्यांकन और सत्यापन को लेकर सवाल उठे थे।
27 अगस्त को मौके पर पहुंचकर हुई जांच
मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत करंजिया द्वारा 27 अगस्त 2026 को मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच के दौरान पुलिया निर्माण की स्थिति और संबंधित प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि पुलिया निर्माण के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं मापदंडों के अनुरूप स्थल चयन नहीं किया गया था। इसके साथ ही कार्य के मूल्यांकन और सत्यापन में भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।जांच में यह भी सामने आया कि पुलिया पूर्व में भी क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, जिसके बाद उसकी मरम्मत कराई गई थी। इसके बावजूद पुलिया दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई। वर्तमान में पुलिया की स्थिति ऐसी है कि वह आवागमन के लिए अनुपयोगी बताई गई है। पुलिया के बार-बार क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
दो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ निर्माण कार्य
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि ले-आउट दिए जाने के करीब दो वर्ष बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इसके बावजूद कार्य के मूल्यांकन और एमआईएस में दर्ज प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता पर अपेक्षित स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया। जिला पंचायत ने इसे संबंधित तकनीकी अधिकारी द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही माना।
कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक
जिला पंचायत डिंडौरी ने मामले में 28 अगस्त 2026 को उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया। इसके जवाब में उपयंत्री ने 1 सितंबर 2026 को अपना पक्ष प्रस्तुत किया। विभाग द्वारा जवाब का परीक्षण किए जाने के बाद इसे समाधानकारक एवं संतोषजनक नहीं पाया गया। जांच में सामने आए तथ्यों, कार्य की स्थिति और प्रस्तुत जवाब के आधार पर उपयंत्री को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया। इसके बाद उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्रवाई
जिला पंचायत के आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के प्रावधानों के तहत भवन प्रसाद भैना, उपयंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जनपद पंचायत करंजिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संभाग डिंडौरी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। शिवनार नाले की पुलिया के निर्माण, क्षतिग्रस्त होने और लंबे समय तक कार्य पूरा नहीं होने को लेकर उठे सवालों के बाद हुई विभागीय जांच में तकनीकी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की गई है। इस मामले में उपयंत्री का निलंबन निर्माण कार्यों में स्थल चयन, गुणवत्ता, मूल्यांकन और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले तकनीकी अमले की जवाबदेही तय किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।










