सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों ने सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन,,,,,, मांगें पूरी नहीं होने पर एक सप्ताह बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी

सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों ने सौंपा 8 सूत्रीय ज्ञापन,,,,,,

मांगें पूरी नहीं होने पर एक सप्ताह बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी

डिंडौरी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों ने बुधवार को अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम नायब तहसीलदार को 8 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से पंचायत स्तर पर कार्य करने के दौरान आ रही परेशानियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों की जांच एवं वसूली संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाने सहित विभिन्न मांगों का निराकरण किए जाने की मांग की गई है। पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों का कहना है कि लगातार जांच, वसूली और कार्रवाई की आशंका के कारण पंचायतों में विकास कार्यों को संचालित करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले निर्माण कार्य तकनीकी स्वीकृति एवं प्रशासकीय स्वीकृति के बाद ही प्रारंभ किए जाते हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर राशि का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी आपत्ति आने पर कई बार सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की जाती है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में सचिव को निलंबित करने तथा सरपंच के विरुद्ध श्रम कारावास जैसे आदेश जारी किए जाते हैं, जिसे पंचायतकर्मियों ने न्यायसंगत नहीं बताया है। उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता संबंधी शिकायत होने पर जिम्मेदारी का निर्धारण नियमानुसार और जांच के बाद किया जाए।

बिना मूल्यांकन राशि आहरण का आरोप लगाकर वसूली पर रोक की मांग

ज्ञापन में निर्माण कार्यों के लिए राशि आहरण को लेकर भी अपनी समस्या बताई गई है। पंचायतकर्मियों का कहना है कि निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सामग्री की खरीदी सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पहले करनी पड़ती हैं। इसके लिए कार्य प्रारंभ होने के बाद स्वीकृत राशि में से आवश्यक राशि आहरित कर सामग्री खरीदी जाती है। लेकिन बाद में बिना मूल्यांकन राशि आहरण का आरोप लगाकर वसूली की कार्रवाई की जाती है, जिससे पंचायत स्तर पर कार्य करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने ऐसी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

आवास योजनाओं की धीमी प्रगति पर कर्मचारियों को जिम्मेदार न ठहराने की मांग

प्रधानमंत्री आवास योजना एवं जनमन आवास योजना की प्रगति को लेकर भी ज्ञापन में स्थिति स्पष्ट की गई है। पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों का कहना है कि आवास योजना की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में जमा होती है। इसके बावजूद आवास निर्माण की प्रगति कम होने पर सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों को निलंबन तथा राशि वसूली की कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। उन्होंने कहा कि हितग्राही स्तर पर निर्माण में देरी होने की स्थिति में सचिव और रोजगार सहायक को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

फर्जी सीएम हेल्पलाइन शिकायतों से परेशान करने का आरोप

ज्ञापन में सीएम हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों का भी मुद्दा उठाया गया। पंचायतकर्मियों ने आरोप लगाया कि कई बार फर्जी शिकायतें दर्ज कराकर सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों पर दबाव बनाया जाता है और उन्हें ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने मांग की कि शिकायतों की जांच के बाद तथ्यहीन शिकायतों को प्रतिवेदन के आधार पर फोर्स क्लोज किया जाए तथा ऐसी शिकायतों के आधार पर सचिव और रोजगार सहायकों का वेतन अथवा मानदेय नहीं रोका जाए।

रोजगार सहायकों का मानदेय समय पर देने और बढ़ाने की मांग

ग्राम रोजगार सहायकों ने अपने मानदेय को लेकर भी समस्या बताई। उनका कहना है कि कई बार उन्हें समय पर वेतन अथवा मानदेय नहीं मिल पाता, जिसके कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मानदेय का नियमित एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही मानदेय में वृद्धि किए जाने की मांग की है।

सरकारी कार्यक्रमों के खर्च का भुगतान करने की मांग

ज्ञापन में ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों, विकास यात्राओं, सम्मेलनों सहित अन्य आयोजनों का मुद्दा भी उठाया गया। पंचायतकर्मियों के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों में टेंट, माइक, कुर्सी सहित अन्य व्यवस्थाएं पंचायत स्तर से कराई जाती हैं, लेकिन इन व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च के लिए स्पष्ट बजट प्रावधान नहीं होता। इसके बावजूद कार्यक्रम की व्यवस्था करना पंचायतों की मजबूरी बन जाती है। उन्होंने मांग की कि ऐसे आयोजनों के लिए व्यय का प्रावधान किया जाए तथा उच्च कार्यालय से भुगतान के संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।

एक सप्ताह में समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं का एक सप्ताह के भीतर निराकरण किए जाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। पंचायतकर्मियों ने कहा कि उनका उद्देश्य पंचायतों के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करना नहीं, बल्कि कार्य करते समय सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कराना है। उन्होंने प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय लेने की अपील की है।

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