
ग्राम पंचायत सचिवों के विरूद्व अनियमितता और लापरवाही बरतने पर हुई कार्रवाई,,,,,,
जनपद समनापुर के दो पंचायत सचिव निलंबित
डिंडौरी। जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता, शासकीय राशि के नियम विरुद्ध भुगतान तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के मामलों में दो पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ग्राम पंचायत जाताडोंगरी की वर्तमान सचिव एवं ग्राम पंचायत भाजीटोला एवं चांदरानी की तत्कालीन सचिव प्रभावती वाटिया और ग्राम पंचायत चांदरानी के सचिव दिगम्बर सिंह राजपूत को मध्यप्रदेश पंचायत सेवा अनुशासन एवं अपील नियम 1999 के नियम-4 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। दोनों सचिवों का निलंबन अवधि में मुख्यालय जनपद पंचायत समनापुर निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
प्रभावती वाटिया पर 1.08 लाख रुपये के भुगतान का मामला
प्रभावती वाटिया के ग्राम पंचायत भाजीटोला में सचिव पद पर पदस्थ रहने के दौरान पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत के उपसरपंच के खाते में 1 लाख 8 हजार 400 रुपये का भुगतान नियम विरुद्ध तरीके से किए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में मध्यप्रदेश पंचायत लेखा नियम 1999 के नियम-3 के विपरीत शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप में मुख्य कार्यपालन अधिकारी विहित प्राधिकारी पंचायत, जिला पंचायत डिंडौरी के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 333 धारा 92/2026 दर्ज किया गया। प्रकरण में 24 जून 2026 को पारित आदेश के तहत कुल राशि में से 54 हजार 200 रुपये 15 दिवस के भीतर जमा करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि आदेश के बावजूद राशि जमा नहीं कराई गई।
चांदरानी में 2.15 लाख रुपये के भुगतान पर भी कार्रवाई
श्रीमती वाटिया के ग्राम पंचायत चांदरानी में सचिव पद पर रहते हुए सीसी रोड निर्माण और पंचायत भवन में गेट निर्माण कार्य से संबंधित 2 लाख 15 हजार रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया। इस संबंध में प्रकरण क्रमांक 332 धारा 92/2026 दर्ज किया गया था। 18 जून 2026 को पारित आदेश में 2 लाख 15 हजार रुपये में से 1 लाख 7 हजार 500 रुपये जमा करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी यह राशि जमा नहीं की गई।
बिना मूल्यांकन के लाखों रुपये के भुगतान का आरोप
प्रभावती वाटिया के खिलाफ एक अन्य प्रकरण भी चल रहा है। ग्राम पंचायत चांदरानी में बेदू घाट निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि 6 लाख रुपये में से 5 लाख 99 हजार 50 रुपये का भुगतान बिना मूल्यांकन के किए जाने का आरोप है। इसी प्रकार दिगम्बर के घर से शिव मंदिर तक सीसी रोड निर्माण के लिए स्वीकृत 4 लाख रुपये में से 1 लाख 64 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार दोनों कार्यों में कुल 7 लाख 63 हजार 550 रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि संबंधित कार्यों के मूल्यांकन पत्रक एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज ग्राम पंचायत कार्यालय में संधारित नहीं पाए गए तथा सीसी रोड का कार्य भी आज दिनांक तक अपूर्ण है। मामले में श्रीमती वाटिया को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और प्रकरण क्रमांक 424/2026 धारा 89 के तहत सुनवाई जारी है।
जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर निलंबन
इन मामलों को देखते हुए कार्यालयीन पत्र दिनांक 3 अगस्त 2026 के माध्यम से श्रीमती प्रभावती वाटिया को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। उन्होंने 7 अगस्त को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन जवाब के साथ आरोपों के संबंध में आवश्यक दस्तावेज एवं अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। जांच में जवाब समाधानकारक नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित प्राधिकारी ने उनके कृत्य को अनुशासनहीनता, पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, कर्तव्य के प्रति उदासीनता तथा शासकीय राशि के दुरुपयोग से जुड़ी वित्तीय अनियमितता मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की।
दिगम्बर सिंह राजपूत भी निलंबित
ग्राम पंचायत चांदरानी के सचिव दिगम्बर सिंह राजपूत के खिलाफ भी पदीय दायित्वों में लापरवाही के मामले में निलंबन की कार्रवाई की गई है। जनपद पंचायत समनापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पत्र में बताया गया कि ग्राम पंचायत चांदरानी की शासकीय भूमि में लगे यूकेलिप्टिस के पेड़ों को काटने की अनुमति निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी की गई, जिससे शासन को लाखों रुपये के नुकसान की बात सामने आई। इसके अलावा पंचायत में समग्र ई-केवाईसी, मनरेगा जॉबकार्डधारियों की ई-केवाईसी, श्रमिक नियोजन, संबल योजना, पेंशन प्रकरण और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति भी निर्धारित लक्ष्य से काफी कम पाई गई।
नियम 3 के उल्लंघन पर निलंबन
प्रस्तुत जवाब असंतोषजनक पाए जाने तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता सामने आने के बाद दिगम्बर सिंह राजपूत को भी मध्यप्रदेश पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 के नियम-3 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के नियम-4 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।










