
पीएडीएस के तहत वितरित चावल की गुणवत्ता पर उठे सवाल
खराब बारदाना, कीड़े और फफूंद वाले चावल की सप्लाई से बढ़ी चिंता अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
डिंडौरी,,,,,। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शासकीय उचित मूल्य दुकानों से गरीब खाद्यान्न पर्चीधारियों को वितरित होने वाले चावल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोतवाली के सामने स्थित मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लाॅजिस्टिक काॅर्पोरेशन के गोदाम से दुकानों को आवंटित चावल की सप्लाई धड़ल्ले से हो रही है। मामले का खुलासा बुधवार की सुबह तब हुआ, जब चावल लोड करने वाले मजदूरों ने इसका विरोध किया। वेयरहाउस में लोडिंग का कार्य करने वाले मजदूरों का कहना है कि कटी फटी बोरियों में रखकर चावल दुकानों में भेजा जा रहा है। इसके साथ ही मिलिंग करके गोदाम में पहुंचाये गये चावल की गुणवत्ता भी अमानक देखी गई है।फटी बोरियों में रखे गये चावल में लुंजी (फफूंद) भी नजर आई है। ऐसे में राशन के रूप में वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता और हितग्राहियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। पूरे मामले पर गोदाम प्रभारी ने बोरियों को बदलने और चावल की गुणवत्ता की निगरानी की बात कही है।
खराब बारदाने से लोडिंग में बढ़ रही परेशानी
वेयरहाउस में कार्यरत मजदूरों ने बताया कि कई चावल की बोरियों का बारदाना इतना कमजोर और खराब हो चुका है कि ट्रक में एक बोरी रखने पर कई अन्य बोरियां भी फट जाती हैं। इससे चावल नीचे बिखर जाता है और उसे दोबारा भरने में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती है। मजदूरों का कहना है कि इस स्थिति के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
चावल में कीड़े और फफूंद
वेयरहाउस में रखे कुछ स्टॉक के निरीक्षण के दौरान खनूजा राईस मिल द्वारा मिलिंग किए गए कुछ चावल की बोरियों में ईल्लियां (कीड़े) दिखाई दीं। वहीं मां नर्मदा राईस मिल द्वारा मिलिंग किए गए कुछ चावल में फफूंद लगी हुई नजर आई। खाद्यान्न की इस स्थिति ने भंडारण व्यवस्था और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चार साल पुराने लाॅट की हो रही सप्लाई
जानकारी के अनुसार वर्तमान में दुकानों तक पहुंचाया जा रहा है चावल का लाट चार साल पुराना है। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लाॅजिस्टिक काॅर्पोरेशन वेयरहाउस और अन्य निजी गोदामों में नागरिक आपूर्ति निगम के द्वारा वर्ष 2022 में इसे भंडारित किया गया था। जिसे अब शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में वितरण के लिए भेजा जा रहा है। लंबे समय तक भंडारण के कारण और उचित रखरखाव न होने के चलते चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में वितरण से पहले प्रत्येक स्टॉक की गुणवत्ता का परीक्षण आवश्यक माना जा रहा है।

गरीब हितग्राहियों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से यही अमानक चावल हजारों गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की रसोई तक पहुंचता है। यदि वितरण किए जा रहे चावल में कीड़े, फफूंद या गुणवत्ता संबंधी अन्य कमियां हैं, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खाद्य सुरक्षा के मानकों के अनुरूप प्रत्येक स्टॉक की जांच कर अनुपयुक्त पाए जाने वाले चावल को तत्काल अलग करना आवश्यक है। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
कौन है जिम्मेदार
पूरे मामले पर सवाल यह है कि यदि भंडारण के दौरान अथवा मिलिंग में चावल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। इसके साथ ही वेयरहाउस में स्टॉक की नियमित निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि ऐसा चावल उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंच रहा है, तो संबंधित विभागों को इसकी गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारी तय करनी होगी।










