
डिंडौरी। भारत इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, निगवानी की एक जीएनएम (GNM) छात्रा ने कॉलेज प्रबंधन पर पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) के नाम पर 22 हजार रुपये की अवैध राशि मांगने, दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन करने से इनकार करने तथा चयनात्मक तरीके से पंजीयन किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। छात्रा ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तत्काल पंजीयन कराने की मांग की है। शिकायत के अनुसार छात्रा ने वर्ष 2021 में भारत इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, निगवानी में जीएनएम पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। वर्ष 2024 में उसका पाठ्यक्रम पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक उसका अनिवार्य पंजीयन नहीं हो सका है। छात्रा का कहना है कि पंजीयन के अभाव में वह नर्स के रूप में नौकरी नहीं कर पा रही है, जिससे उसका भविष्य और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
22 हजार रुपये मांगने का आरोप
शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन ने उसके जीएनएम पंजीयन के लिए 22 हजार रुपये की मांग की। उसका कहना है कि नियमानुसार एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पंजीयन शुल्क 1200 रुपये तथा अभिलेख संशोधन शुल्क 240 रुपये निर्धारित है। इसके बावजूद कॉलेज द्वारा 22 हजार रुपये की मांग करना पूरी तरह अवैध और मनमाना है।
छात्रा का दावा है कि उसने उक्त राशि देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसके पंजीयन की प्रक्रिया रोक दी गई।
जनसुनवाई के बाद एमपी ऑनलाइन से किया आवेदन
छात्रा के अनुसार उसने मामले की शिकायत जनसुनवाई में की थी। वहां से उसे कॉलेज के दस्तावेज लेकर स्वयं एमपी ऑनलाइन के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी गई। इसके बाद उसने 13 अप्रैल 2026 को एमपी ऑनलाइन के माध्यम से जीएनएम पंजीयन के लिए आवेदन किया तथा निर्धारित 1200 रुपये शुल्क भी जमा किया।
कुछ समय बाद भी पंजीयन नहीं होने पर उसने अपने पति को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल भेजा। वहां जानकारी मिली कि कॉलेज द्वारा उसका आवेदन आगे (फॉरवर्ड) ही नहीं किया गया है, जिसके कारण आवेदन की स्थिति में लंबित है।
संशोधन के लिए कॉलेज की अनुशंसा जरूरी, फिर भी नहीं दिया पत्र
छात्रा ने बताया कि आवेदन में कुछ त्रुटियां रह गई थीं। त्रुटियों के संशोधन के लिए उसने मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल के निर्देशानुसार 240 रुपये का चालान भी जमा किया। शिकायत के अनुसार नर्सिंग काउंसिल ने बताया कि आवेदन में संशोधन के लिए संबंधित कॉलेज की अनुशंसा अनिवार्य है। इसी कारण वह 16 जुलाई 2026 को कॉलेज पहुंची और संचालक से अनुशंसा पत्र देने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने कथित रूप से पत्र देने और हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। छात्रा का कहना है कि काउंसिल के अधिकारियों ने स्पष्ट बताया था कि आवेदन में इस प्रकार की त्रुटियां सामान्य हैं और कॉलेज की अनुशंसा मिलने पर तुरंत संशोधन कर पंजीयन किया जा सकता है।
‘पैसे देने वालों का हुआ पंजीयन, मेरा रोका गया‘
शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया है कि जिन अन्य छात्राओं ने कॉलेज द्वारा मांगी गई 22 हजार रुपये की राशि जमा कर दी, उनका पंजीयन ऑनलाइन कर दिया गया, जबकि केवल उसका आवेदन लंबित रखा गया क्योंकि उसने अवैध राशि देने से इनकार किया।
उसका आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा उसके साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और जानबूझकर उसका पंजीयन रोका गया है।
कलेक्टर से की यह मांग
छात्रा ने कलेक्टर से मांग की है कि भारत इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, निगवानी को तत्काल निर्देशित किया जाए कि उसके आवेदन में आवश्यक संशोधन कर अनुशंसा पत्र जारी किया जाए तथा उसका आवेदन मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल, भोपाल को तत्काल फॉरवर्ड किया जाए। इसके साथ ही पंजीयन की प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।
‘करियर संकट में’
छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह एक गरीब एवं संघर्षशील परिवार से आती है। उसकी पूरी पूंजी उसकी शिक्षा और प्रमाण-पत्र हैं। कॉलेज की कथित मनमानी के कारण उसका पंजीयन अटका हुआ है, जिससे उसका व्यावसायिक करियर और रोजगार दोनों संकट में पड़ गए हैं। उसने प्रशासन से न्याय दिलाने और शीघ्र पंजीयन सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई है।










