
पन्नी की छत तले संवर रहा नौनिहालों का भविष्य, जर्जर स्कूल भवन पर बेखबर जिम्मेदार
समनापुर के बैगा बहुल गांव की प्राथमिक शाला में बारिश से बचाने को छत पर तनी पन्नी, जबकि कुछ कदम दूर चमचमाता बना है प्रसाधन गृह
डिंडौरी। आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। विकासखंड समनापुर की प्राथमिक शाला बीतल बहरा में मासूम बच्चे जर्जर भवन के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में टपकती छत से बचाने के लिए स्कूल की छत पर प्लास्टिक की पन्नी डाल दी गई है, ताकि किसी तरह कक्षाएं संचालित हो सकें। विडंबना यह है कि जिस भवन में बच्चे प्रतिदिन लगभग छह घंटे बिताते हैं, उसकी हालत बेहद खराब है, जबकि उससे कुछ ही दूरी पर लाखों रुपये की लागत से बना प्रसाधन गृह चमचमाता नजर आता है।यह गांव विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार की पीएम जनमन योजना के तहत ऐसे गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी इस स्कूल के जर्जर भवन की ओर किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं गया। स्कूल की छत पर पन्नी लगाकर बच्चों को बारिश से बचाने की कोशिश की जा रही है, जो शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बयां करती है। प्राथमिक शाला में कुल 17 विद्यार्थियों का नामांकन है। यहां एक नियमित शिक्षक और एक अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं, जो सीमित संसाधनों के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान छत से पानी टपकने के कारण बच्चों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। भवन की जर्जर स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन का शीघ्र सर्वे कराकर नया भवन स्वीकृत किया जाए, ताकि नौनिहाल सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।










