45 करोड़ रु. की सीसी सड़क में दो साल में ही आई दरारें, गुणवत्ता पर उठे सवाल
निर्माण एजेंसी और विभाग की खुली पोल, दरारें भरकर की जा रही है लीपापोती

डिंडोरी,,जिले के विकास के लिए बड़ी उपलब्धि बताई गई बजाग-समनापुर सीसी सड़क अब अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और करीब 32 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण हुए अभी दो वर्ष ही बीते हैं, लेकिन सड़क कई स्थानों पर दरकने लगी है। जगह-जगह आई दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी और करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग द्वारा बजाग और समनापुर जनपद मुख्यालय को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस सीसी सड़क का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य का जिम्मा जीआरटीसी कंपनी को सौंपा गया था। सड़क निर्माण के समय इसे क्षेत्र के लिए विकास की नई राह बताया गया था, जिससे ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी।
निर्माण के दौरान भी उठे थे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठाए गए थे। निर्माण सामग्री, कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर शिकायतें भी सामने आई थी। हालांकि उस समय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सभी कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप बताया गया और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब सड़क में जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं, तब लोगों को लग रहा है कि निर्माण के दौरान उठाई गई आशंकाएं निराधार नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा होती, तो शायद आज सडक की दुर्दषा ऐसी नहीं होती।
दो साल में दरकी सड़क, उठ रहे तकनीकी सवाल
सीसी कक्रीट सड़कें आमतौर पर लंबे समय तक टिकाऊ मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तकनीक और गुणवत्ता के साथ निर्मित सीसी सड़कें कई वर्षों तक बिना किसी बड़े नुकसान के उपयोग में रहती हैं। ऐसे में निर्माण के महज दो वर्ष के भीतर सड़क में चैड़ी दरारे पड़ना कई तकनीकी सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि सडक निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन किया गया होता, तो इतनी जल्दी सड़क की सतह प्रभावित नहीं होती। अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर सडक में दरारें पड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या है। क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर थी, क्या तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई, या फिर निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही बरती गई?
निर्माण ऐंजेसी द्वारा की जा रही है लीपापोती
सड़क में आई दरारों को देखते हुए संबंधित एजेंसी द्वारा मरम्मत कार्य शुरू किया गया है। सड़क की दरारों को भरकर स्थिति सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल दरारों को भर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों का तर्क है कि जब तक दरारों के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच नहीं होगी, तब तक भविष्य में फिर से यही समस्या सामने आ सकती है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क में इतनी जल्दी आई खराबी को केवल सामान्य मरम्मत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बजाग-समनापुर सड़क परियोजना में लगभग 45 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि निर्माण कार्य टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण नहीं होगा तो जनता को उसका वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण में खर्च की गई राशि जनता के कर से प्राप्त धन है, इसलिए निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभाग और निर्माण एजेंसी दोनों की जिम्मेदारी है। यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। फिलहाल सड़क की दरारों को भरने का कार्य जारी है, लेकिन क्षेत्रवासियों की निगाहें अब लोक निर्माण विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोग जानना चाहते हैं कि विभाग केवल मरम्मत तक सीमित रहेगा या फिर सड़क के खराब होने के वास्तविक कारणों की जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी भी तय करेगा। बजाग-समनापुर सीसी सड़क क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। ऐसे में निर्माण के दो वर्ष के भीतर सामने आई यह स्थिति न केवल सड़क की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि विकास कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण और विभागीय निगरानी की व्यवस्था पर भी गंभीर बहस खड़ी करती है।










