शहडोल में प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी निलंबित, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर पुलिस की कार्रवाई, करोड़ों फॉलोअर्स वाले पुलिसकर्मी पर विभागीय शिकंजा

शहडोल। मध्य प्रदेश पुलिस के चर्चित सोशल मीडिया चेहरों में शामिल प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी को शहडोल पुलिस अधीक्षक द्वारा निलंबित किए जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। विभाग ने उन पर बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया है। वहीं प्रधान आरक्षक का कहना है कि वे स्वास्थ्य कारणों से अवकाश पर थे और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी।मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब यह सामने आया कि अनुपस्थिति की अवधि के दौरान उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार वीडियो अपलोड होते रहे। इसी आधार पर पुलिस विभाग ने सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला मानते हुए कार्रवाई की है।
19 मई से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे
जानकारी के अनुसार, प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी 19 मई से अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं हुए थे। विभागीय स्तर पर उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया। प्रारंभिक जांच के बाद यह पाया गया कि निर्धारित अवधि में उन्होंने नियमित रूप से ड्यूटी नहीं की, जिसके चलते पुलिस रेग्युलेशन-64 के तहत उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई। निलंबन आदेश जारी होने के बाद उन्हें रक्षित केंद्र शहडोल से संबद्ध कर दिया गया है। अब विभागीय जांच के माध्यम से पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान
विवेकानंद तिवारी केवल पुलिस विभाग में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया में भी एक बड़ा नाम माने जाते हैं। उनके यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम सहित विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ 79 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। वे मुख्य रूप से सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, हेलमेट के उपयोग, वाहन चलाने में सावधानियों और जनजागरूकता से जुड़े वीडियो बनाते रहे हैं। उनके वीडियो को देशभर के लोग देखते हैं और लाखों की संख्या में साझा भी करते हैं। बताया जाता है कि उनके सोशल मीडिया कंटेंट को अब तक 552 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। यही कारण है कि वे प्रदेश के सबसे चर्चित पुलिसकर्मियों में शामिल हैं।
विभाग ने उठाए सवाल
पुलिस विभाग का कहना है कि जिस अवधि में प्रधान आरक्षक ड्यूटी से अनुपस्थित थे, उसी दौरान उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार नई सामग्री अपलोड होती रही। विभाग का मानना है कि यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है और सेवा नियमों के संदर्भ में इसकी जांच आवश्यक है। अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते सेवा नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई कर्मचारी बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित रहता है तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है, चाहे उसकी सामाजिक या सार्वजनिक पहचान कितनी भी बड़ी क्यों न हो।
विवेकानंद तिवारी का पक्ष
निलंबन के बाद विवेकानंद तिवारी ने अपनी सफाई भी दी है। उनका कहना है कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और इलाज करा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपनी अनुपस्थिति और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दे दी थी।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो उस दौरान अपलोड हुए, उन्हें उन्होंने स्वयं पोस्ट नहीं किया। उनके अनुसार उनके सोशल मीडिया अकाउंट का संचालन उनकी पत्नी और उनकी टीम द्वारा किया जाता है, इसलिए वीडियो अपलोड होना यह साबित नहीं करता कि वे स्वयं सक्रिय थे।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामले में अंतिम निर्णय विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा। जांच में यह स्पष्ट होगा कि अनुपस्थिति की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, अवकाश की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं, तथा सोशल मीडिया गतिविधियों और सेवा नियमों के बीच क्या संबंध बनता है।










